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शब्दार्थको० कौटुम्बिक पु० पुरुष को स० वोलाकर एक ऐसा व० बोले खि• शीघू दे० देवानुप्रिय ह० हस्तिना
| पुर ण नगर चा० बंदीवान को मुक्त क० करो मा० मान उ० उन्मान ५० प्रमाण व० वृद्धि क० करो | ह. हस्तिनापुर ण० नगर को स० आभ्यंतर वा बाह्य आ० सिंचन स० संमार्जित ओ• उपलिप्त क० | करा जू० यूपस० सहस्त्रच० चक्र स० सहस्र पू० पूजा म. महामहिमा स० सत्कार उ० उत्सव करीम मुझ आ० आज्ञा प०पीछीदो त. तब से वे को कौटुबिक पुरुष व बलराजा से एक ऐसा
राया कोडंबियपुरिसे सद्दावेइ २ त्ता एवं वयासी खिप्पामेव भो देवाणुप्पिया! हत्थिणाउरे णयरे चारगसोहणं करेह चारगसोहणं करेइत्ता माणुम्माणप्पमाणवठ्ठणं करेह माणुमाणप्पमाणवठ्ठणं करेइत्ता, हत्थिणाउरं नयरं सभिंतरबाहिरियं आसियसम्मजिओबलित्तं जाव करेहिय कारवेहिय करेत्ताय कारवेत्ताय, जूवसहस्संवा चक्कसह
स्संवा, पूयामहामहिमसक्कारंवा ऊसवेह २ त्ता ममेयमाणत्तियं पञ्चप्पिणह ॥ तएणं भावार्थ देवानुपिय ! तुम हस्तीनापुर नगर के कारागृह शीघ्र शुद्ध करो उन में रहेहुवे बंदी जनों को मुक्त करो. मान
० उन्मान प्रमाण की वृद्धि करो. हस्तिनापुर नगर की अंदर व बाहिर सुगंधि जल का सिंचन करो, कचवर
दूर करो, गोबर प्रमुख से लींपों ऐसे सब कार्य करके मुझे मेरी आज्ञा पीछी दे दो. कौटुम्बिक पुरुषों ने
8- पंचमांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती)
462 अग्यारवा शतकका अग्यारहवा उद्दशा
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