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________________ १५८२ शब्दार्थोय. प्रभावती दे० देवी हो० थी सु० सुकुमार ५० वर्णन युक्त जा. यावत् व० विचरता है ॥ १३ ॥ त० तब से वह ५० प्रभावती दे० देवी अ० एकदा तं. उस वा. वासगृह में अ० आभ्यंतर स० सचित्र काम बा० बाह्य दू० सफेद घ० घीसा म० अच्छाकिया वि. विचित्र उ० उपलाभाग देदिप्यमान त० तला म० मणि र० रन पनाशकिया अं० अंधकार ब० बहुमम सुविभक्त देवदेशभाग पं. पांचवर्ण के स० सरस सु. सुरांभ मु० युक्त पु० पुष्प पुं० पुंज उ० उपचार क• युक्त का• कृष्णागरु प० प्रवर कुं. कुंद उ० उरुक धू धूप म० मघमघायमान ग• गंध. उ० उद्भूत अरम्य सु० सुगंध प० प्रधान गं तस्सणं बलस्स रण्णो पभावई णामं देवी होत्था सुकुमाल वण्णओ जाव विहरइ ॥१३॥ तएणं से पभावई देवी अण्णयाकयाइं तंसि तारिसगंसि वासघरंसि अभितरओ सचित्तकम्मे बाहिरओ दूमिय घटुम? विचित्त उल्लोगचिल्लिलतले, मणिरयण पणासियं धकारे बहु समसुविभत्तदेसभाए, पंच वण्णसरस सुरभि मुक्कपुप्फ पुंजोश्यार कलिए कालागरुपवर कुंदरुक तुरुकधूव मघमघंत, गंधुडुयाभिरामे, सुगंधवरगंधिए गंधवहिभूए । राज्य करता था. उस बल राजा को प्रभावती नामक राणी थी. वह मुकुमाल यावत् मनोहर थी ॥१३॥ एकदा समय में प्रभावती राणी अंदर से चित्रामणयुक्त व बाहिर से कोमल प्रमाणादिक से घीसने मृदु स्पर्शवाला, विचित्र प्रकार के चित्रोंयुक्त उपर का भागवाला, देदीप्यमान अधो भागवाला, चंद्रकान्तादि । २ अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋा प्रकाशक-राजावहादुर लाला मुकदेव सहायजी ज्वालाप्रसादजी, भावार्थ
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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