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________________ 3> १५५३ तंचव जाव भंडणिक्खेवं करेइ २ त्ता, हथिणापुरे णयरे सिंघाडग जाव समुदाय ॥ सूत्र तएणं तस्स सिवस्स रायरिसिस्स अंतियं एयमढे सोचा णिसम्म जाव समुदाय, तंणं मिच्छा, सभणे भगवं महावीरे एवमाइक्खइ एवं खलु जंबूद्दीवादीया दीवा लवणादीया समुद्दा तंचेव जाव असंखजा दीवसमुद्दा पण्णत्ता समणाउसो ! ॥ २० ॥ तएणं से सिवे रायरिसी बहु जणस्स अंतियं एयमद्रं सोचा णिसम्म संकिए कंखिए वितिगिछिए भेद समावण्णे कलुस समावण्णे जाएयावि होत्था तएणं तस्स सिवस्स रायरिसिस्स संकियस्स कंखियस्स जाव कलुससमावण्णस्स विभंगे अण्णाणे खिप्पामेव परिवडिए २१॥तएणं तस्स सिवस्स रायरिसिस्त अयमेयारूवे अब्भत्थिए जाव समुप्पजित्था एवंखलु समणे भणवं महावीरे आदिगरे तित्थगरे जाव सव्वण्णू सव्वदरिसी आगासगएणं चक्केणं भावार्थ श्रवण कर जो ऐमा कहते हैं उन का भी कथन मिथ्या है. श्रमण भगवंत महावीर स्वामी ऐमा कहते हैं यावत् प्ररूपते हैं कि जम्बूद्वीप आदि द्वीप और लवण समुद्र आदि समुद्र वलयाकार एक एक से ४० वेष्टित रहे हुवे हैं और विस्तार में दुगुने हैं ॥ २० ॥ उस समय में लोगों की पात से ऐसा श्रवण कर ॐ शिवराजार्ष को शंका कांक्षा व कालुष्यता उत्पन्न हुई इ% से वह विभंग अज्ञान से पतित हुवा ॥ २१ ॥ फोर शिवराजर्षि को ऐसा अध्यवसाय हुवा कि धर्म की आदि के कग्नेवाले यावत् सर्वज्ञ सर्वदर्शी तीर्थकर > पंचांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती ) सूत्र *240988 अग्यारवा शतकका नववा उद्देशा88
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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