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________________ 8800 पंचमाङ्ग विवाह पण्णत्ति ( भगवती) सूत्र अविरया विरयाविरया ? गोयमा ! णो विरया णो विरयाविरया, अविरएवा, अ-.. विरयावा ॥ १९ ॥ तेणं भंते ! जीवा किं सकिरिया अकिरिया ? गोयमा! णो अकिरिया सकिरिएवा सकिरियावा ॥ २० ॥ तेणं भंते ! जीवा, किं सत्तविहबंधगावा अट्ठविह बंधगावा? गोयमा! सत्तविह बंधएवा; अट्टविह बंधएवा, अट्ट भंगा ॥ २१ ॥ तेणं भंते! जीवा किं आहारसण्णोवउत्ता, भयसण्णोवउत्ता, मेहुणसण्णो वउत्ता, परिग्गहसण्णोवउत्ता? गोयमा ! आहारसण्णोवउत्तेवा असीति भंगा ॥२२॥ है परंतु आहारक है उन में आठ भांगे पाते हैं ॥ १८ ॥ अहो भगवन् ! क्या वे जीव विरती, अविरती है या विरताविरती है ? अहो गौतम ! विरती नहीं है विरताविरती नहीं है परंतु अविरती हैं इस में दो भांगे पाते हैं ॥ १९ ॥ अहो भगवन् ! क्या वे जीव संक्रिय हैं या अक्रिय हैं ? अहो गौतम ! वे जीवों , अक्रिय नहीं है परंतु सक्रिय में एक वचन द्विवचन के दो भांगे होते हैं ॥ २० ॥ अहो भगवन् ! क्या वे. जीव सात प्रकार के बंधवाले हैं या आठ प्रकार के बंधवाले हैं ? अहो गौतम ! सात प्रकार के बंधवाले* 66 व आठ प्रकार के बंधवाले यो आठ भांगे जानना. ॥२१॥ अहो भगवन् ! क्या वे जीवों आहार संज्ञा वाले % हैं, भय संज्ञा वाले हैं, मैथुन संज्ञावाले हैं व परिग्रह संज्ञावाले हैं ? अहो गौतम ! उन जीवों में चारों संज्ञा । - अभ्यारवा शतक का पहिला उद्देशा 4.80
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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