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________________ * प्रकाशक .४३८ शब्दार्थको ठि० स्थितिवाला दे० देव किल्विपि दे देव में दे० देव किस्विपिपने उ० उत्पन्न हुवा ॥९० ॥ त० तब भ० भगवन्त गो गौतम ज० जमाली अ० अनगार को का० काल प्राप्त जा. जानकर जे० जहां स० श्रमण भ० भगवन्त म. महावीर ते नहां उ• आकर म. श्रमण भ. भगवन्त म. महा को वं० वंदन कर ज० नमस्कार कर ए. एसा व• बोले दे. देवानुप्रिय का अं० अंतेवासी कु• कुशीष्य हज जमाली अ० अनगार का काल के अवसर में का• काल करके क० कहां ग० गया क. कहां उ०१२ उत्पन्न हुआ गो० गौतमादि म० मंरा अं० अंतेवासी कुछ कुशीष्य ज जमाली अ० अनगार म० मुझे ए०१४ सियत्ताए उववण्णे ॥ ९० ॥ तएणं भगवं गोयमे जमाले अणगारं कालगयं जा- अ णित्ता जेणेव समणे भगवं महावीरे तेणेव उवागच्छइ २ त्ता समणं भगवं महावीरं .. वंदइ णमंसइ वंदित्ता नमंसित्ता, एवं वयासी एवं खलु देवाणुप्पियाणं अंतेवासी कुासस्से जमाली णाम अणगारे कालमासे कालं किच्चा कहिंगए कहिं उववण्णे? |गोयमादि! समणे भगवं महावीरे भगवं गोयमं एवं वयासी एवं खलु गोयमा ! मम अतेवासी देवपने उत्पन्न हुआ ॥ १० ॥ उस समय भगवान् गौतम जमाली अनगार को काल किया हुवा जानकर श्रमण भगवंत महावीर स्वामी की पास आये. और वंदना नमस्कार कर ऐसा बोले कि अहो भगवन् ! आपका कुशिष्य जमाली अनगार कालकर कहां गया कहां उत्पन्न हुवा ? श्रमण भगवंत महावीर स्वामी :48 अनुवादक-यालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी ला सुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी * भावाथ
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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