________________
wwww
शब्दार्थ पडका पो० वस्त्र मु० मुख को बं० वांधकर ज० जमाली ख० क्षत्रिय कुमार को प० बहुत ज० यत्ना.
से च० चार अगुल व० वर्जकर नि० निष्क्रमण योग्य अ० अग्रकेश क. कापे ॥ ४९ ॥ त० तब से. वह ज० जमालि ख० क्षत्रिय कमार की मा० माता है. हंश समान ५० श्वेत वस्त्र में अ० अग्रकेश प०
१३०.८ लेकर सु० सुरभि गं गंधोदक से १० धोकर अ० मुख्य व प्रधान ग० गंध म. पुष्प से अं०१ पूजकर सु. शुद्ध व वस्त्र से बं० बांधे र० रत्त क० करंड में प० डालकर हा हार वा० वारिधारा
जमालिस खात्तय कुमारस्स परेणं जत्तेणं चउरंगुलवजे निक्खमणप्पओगे अग्गकेसे कप्पेइ ॥ ४९ ॥ तएणं से जमालस्स खत्तियकुमारस्स माया हंसलक्खणणं पडसाडएणं अग्गकेसे पडिच्छइ २ त्ता, सुरभिणा गंधोदएणं पक्खालेइ २ त्ता अग्गेहिं , वरेहिं गंधेहि मल्लेहिं अंचेइ २ त्ता, सुद्धणं वत्थेणं बंधेइ २ त्ता रयणकरंडगंसि
पक्खिवइ २ ता, हारवारिधारसिंदुवारछिण्णमुत्तावलिप्पगासाइं सुतविओगदूसहाई जमाली क्षत्रिय कुमार का लोच करने के लिये चार अंगूल प्रमाण केश छोडकर दीक्षा योग्य बालों काटे ॥४१॥ तब जमाली क्षत्रिय कमार की माताने हन समान श्वेत वस्त्र में कटे हवे बाल
धारन किये. सुगंधित पानी से धोये, श्रेष्ट गंधमाला से पूजन किया, निर्मल वस्त्र में वांधे, रत्नों के कर 1 डिये में स्थापन किये. और छदाया हार, पानी की धारा, निगुण्डी जात के 'पुष्पों व मोतियों की
* अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी है।
* प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *
~
भावार्थ
wamw