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________________ * शब्दार्थ चे० चैत्य ए. ऐसे ज० जैसे उ० उववाद में जा. यावत् ति तीन विधसे १० पर्युपासना से ५० पूजन है ॥ २२ ॥ त• तब तक उन ज० जमाली ख क्षत्रिय कुमारको तं० उस में बडे ज०. मनुष्य के शब्द जा. यावत् म० सन्निपात स० सूनते पा० देखते अ० इसरूप अ० अध्यवसाय जा० यावत् स० उत्पन हुवा किं. क्या अ० अध ख० क्षत्रिय कुंड ग्राम में इं० इन्द्रमहोत्सव खं. स्कन्दमहोत्सव मु. मुकंदमहोत्सव सणा० नागमहोत्सव ज० यक्षमहोत्सव भू. भूतमहोत्सव कू• कृपमहोत्सव त० तडागमहोत्सव न० नदीमहोत्सव पज्जुवासणाए पज्जुवासइ ॥ २२ ॥ तएणं तस्स जमालिस्स खत्तियकुमारस्त तं महया जण सदंवा आव साण्णवायंवा सुणमाणस्वा पासमाणस्सा अयमयारूवे । अज्झथिए जाव समुप्पजित्था किंणं अज खत्तियकुंडग्गामे गयरे इंदमहेइवा, खंदमहेइवा, मुगुंदमहेइवा, णागमहेइवा, जक्खमहेइवा, भूयमहेइवा, कूवमहेइवा, तडा ___ गमहेइवा,नईमहेइवा,दहमहेइवा, पव्वयमहेइवा रुक्खमहेइवा, चेइयमहेइवा, थूवमहईवा, भावार्थ क्षत्रिय कुंड ग्राम नगर में से एकदिशी तरफ ब्राह्मण कुंड ग्राम नगर में बहुशाल चैत्य में जाने लगे यावत् तीन 20 योग की विशुद्धता पूर्वक भगवंत की भक्ति करने लगे ॥ २२ ॥ उस समय में गांव में ऐसा बडा जनशब्द यावत् सन्निपात सुनकर व देखकर जमाली क्षत्रिय कुमार को ऐसा अध्यवसाय उत्पन्न हुवा कि क्या आज 1 क्षत्रिय कुंड नगर में इन्द्र महोत्सव, स्कंद महोत्सव मुकुंद महोत्सव, नाग महोत्सव, यक्ष महोत्सव, भूतमहोत्सव, ...। पंचमांग विवाह पण्णत्ति (भिवगती.) सूत्र 38:05 नवमां शतकका तेत्तीसवा उद्देशा wrimmmmmmm
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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