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________________ शब्दार्थ 1 अंगाकारकरे गो गौतम वायालवीय पने उ अंगीकार करे णोनी पंपंडित वीयपन नोनहीं वा वाल- * पंडिन वीर्यको ॥२॥ जी. जी. भंभापा मो मोडनीय कर कीये क० कर्म के 7 उदयसे अ० अतिक्रमे १० हां अ. अतिक्रमे से वहभं भगा जा. यावत् वा. वाल पंडित बीय पने अ० अतिक्रमे बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋाषेनी है Annnnnvironmentarnar रियत्ताए उबट्टाएजा णो पंडिय बीरियताए उबट्टाएजा, णो बाल पंडिय वरियत्ताए उवदाएजा ॥ २ ॥ जीवणं भंते ! मोहणिजेणं कडेणं कम्मेणं उदिन्नणं अवक.मेजा? हंता अवकमेजा. से भंते ! जाय बालरंडिय वीरियत्ताए अवकमज्जा ? गोयमा ! बाल वीरियत्ताए अवकमेजा, नो पंडिय वीस्थित्ताए अवकामेजा. सिय बाल पंडिय * प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवमहायजी बालापमादजी * भावार्य र वार्य व बाल पंडित वीर्य से अंगीकार नहीं करना है ॥ २ ॥ अव अपक्रयण सो पीछा पडना उस संबंध में प्रश्न पूछते हैं. अहो भगवन : जीव मोहीय कर्म के उत्य से अपकरता है, उपर के गुगस्थान पर है गया हवा पीछा पडता है ? हां गौतमः जीव मोरनीय कर्म के उदय मे उत्तम गुगस्थान से हीन गुगस्थान को जाता है. हो भगार! । वीर्य महिल जाता है या वीर्य सहित जाता है ? अहो गत! वीर्य में माहित जाता है. यदि वीर्य महित जाता है तो क्या बाल वीर्य मे. पं.डत वीर्य से या पाठ पंडित वीर्य से जाता है. ? अहो गौतम : बाल वीर्य मे अपक्रमे परंतु पंडित वीर्य मे अपक्रमे नहीं कदाचित बाल पंडित
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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