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________________ सूत्र भावार्थ गस्स वाणमंतरदेव पवेसणगस्स जीइसियदेव पवेसणगरस, वैमाणियदेव पवेसणगरस, कयरे २ जाव विसाहियावा ? गंगेया ! सव्वत्थोवे वैमाणिय देवपवेसणए, भवण वासिदेव पवेसणए असंखेजगुणे, वाणमंतरदेव पवेसणए असंखेज्जगुणे, जोइसियदेव पत्रेण संखज्जगुणे ॥ २६ ॥ एयरसणं भंते ! णेरइय पवेसणगस्स, तिरिक्ख जोणिय पवेसणगर मणुस्स पवेसणगस्स, देव पवेसणगस्स कथरे कयरे जाव विसेलाहियावा ? गंगेया ! सव्वत्योत्रे मणुस्स पबेसणए, णेरइय पत्रेसणए असंखेज्जगुणे, देव पवेसणए असंखेजगुणे, तिरिक्ख जोणिय पत्रेसणए असंखेज्जगुणे ॥ २७ ॥ संयोगी भांगे कहते हैं ज्योतिषी, भवनपति घाणव्यंतर ज्योतिषी भवनपति वैमानिक, ज्योतिषी वाणव्यंतर वैमानिक अथवा ज्योतिषी भवनपति वाणव्यंतर वैमानिक में उत्पन्न होवे || २५ || अहो भगवन् ! इन भवनपति वाणव्यंतर ज्योतिनी व वैमानिक देव प्रवेशन में से कौन किन से अल्प बहुत यावत् विशेषाधिक है ? अहो गांगेय ! सब मे थोडे वैमानिक देव इस से भवनपति देव असंख्यात गुने, इस मे वाणव्यंतर देव असंख्यात गुने इस से ज्योतिषी देव संख्यात गुने || २६ || अहो भगवन् ! नरक निर्येच मनुष्य व देव प्रदेशन में से कौन किस से अल्प बहुत यावत् विशेषाधिक है ? अहो गांगेय ! सब से थोडे मनुष्य 43 अनुवादक बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी * प्रकाशक राजा बहादुर लाला सुखदेवसहायती ज्वालाप्रसादजी * १३२४
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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