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________________ - सत्र AAN १२९४ भावार्थ *०१ अनुवादक-बालब्रह्मचारीमुनि श्री अमोलक ऋषिजी पंकाए होजा, एवं जाव अहवा एगे रयणाए दो सकाराए, एगे वालुयाए, एगे अहेसत्तमाए होज्जा ४ । अहवा दो रयणाए, एगे सकराए, एगे वालुयाए एगे षंकाए होज्जा, एवं जाव अहवा दो रयणाए, एगे सकराए एगे वालुयाए एगे अहे सत्तमाए होज्जा ४ ॥ अहवा एगे रयणाए एगे सक्कराए, एगे पकाए, दो धूमाए होज्जा, एवं __ जहा चउण्हं चउक्कसंजोगो भणिओ, तहा पंचण्हवि चउक्क संजोगो भाणियव्यो, इस तरह जैसे चार जीवों के तीन संयोगी भांगे कहे पैसे ही पांच जीवों के तीन संयोगी भांगे जानना. इतना विशेष कि उस में एक की साथ संचारना थी यहां दो की साथ संचारना होवे इस तरह २१.० भांगे। होवे इसका अंतिम भांगा तीन जीव धूम्रप्रभा एक जीव तम प्रभामें एक जीव तम तम प्रभामे उत्पन्न होवे. अब चतुष्क संयोगी १४० भांगे कहते हैं. एक रत्नप्रभा में, एक शर्कर प्रभा में एक बालु प्रभा में दो पंकप्रभा में यावत् एक रत्नप्रभा में एक शर्कर प्रभा में एक वालुपभा में दो तम तम प्रभा में यों चार भांगे.. अथवा एक रत्नप्रभा में एक शर्कर प्रभा में दो बालुप्रभा में एक पंकप्रभा में यावत् एक रत्नप्रभा में एक शर्कर प्रभा में दो बालुपमा में एक तम तम प्रभा में यों चार. अथवा एक रत्नप्रभा में दो शर्कर प्रभा में एक बालुप्रभा में एक पंकप्रभा में यावत् एकरत्नप्रभा में दो शर्कर प्रभा में एकबालुप्रभा में एक तमतम प्रभा में यों चार भांगे. अथवा दो रत्नप्रभा में एक शर्करप्रभा में एक बालुप्रभा मे एक पंक प्रभा में यावत् दो रत्न * प्रकाशक-राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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