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सूत्र
भावार्थ
पंचमार्क विवाह पण्णा ( भगवती ) सूत्र
भंते! कयरंमि उच्चत्ते होजा ? गो० ! जहन्नेणं सत्तरयणीए उक्कोसेणं पंचधणुसइए होज्जा | सेणं भंते ! कयरंमि आउए होजा ? गोयमा ! जहन्नणं साइरेगट्ठबासाउर उक्कोसणं पुव्त्रको डिआउए होजा ॥ ऐणं भंते ! किं सवेदए होजा, अवेदर होजा ? गोधमा ! संवेद होना, नो अवदर होज्जा ॥ जइ संवेदर होजा किं इत्थवेदएहोजा, पुरिसवेद होज्जा. पुरिसनपुंसगवेदए होजा, नपुंसंगवेदए होज्जा ? गोयमा ! नो इत्थवेदए होज्जा, पुरिसवेदएहोज्जा, नो नपुंसगवेदए हांजा, पुरिसनपुंसगवेदएवा होजा ॥ सेणं युक्त होवे ? अहो गौतम ! साकारोयुक्त व अनाकारोपयुक्त होवे. अहो भगवन् ! उस को कौनसा संघन होवे ? अहो गौतम ! उस को वज्रऋषभ नाराचसंघयन होते. अहो भगवन् ! उस को कौनसा संस्थान होवे ? अहां गौतम ! छ संस्थान में से कोई भी एक संस्थान होवे. अहो भगवन् ! उस की ऊंचाई कितनी होवे ? अहो गौतम ! जघन्य सात हाथ उत्कृष्ट पांच सो धनुष्य. अहो भगवन् ! उस का कितना आयुष्य कहां ? अहो गौतम ! जघन्य आठ वर्ष से अधिक उत्कृष्ट पूर्व कांड. अहो भगवन् ! क्या वह { सवेदी या अवेदी होता है ? अहो गौतम ! वह सवेदी होता है परंतु अवेदी नहीं होता है. यदि संबंदी होता है तो क्या स्त्री वेदी, पुरुष बंदी, पुरुष नपुंसक वेदी या नपुंसक वेदी होता है ? अहो गौतम ! पुरुष {वेदी को व पुरुष नपुंसक वेदी को होवे परंतु स्त्री वेदी व नपुंसक वेदी को होवे नहीं. अहो भगवन् ! क्या
4942 ननत्र शतक का एकतीपत्रा उद्देशा 80-8
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