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शब्दार्थ 14 होती हैं इ० इति अ० कडा से• वह ए. ऐसे भं० भगवन् ॥ ९॥ १॥ .. .
०, रा. राजगृह जा. यावत् ए. ऐना व० बोले जं. जंबूद्वीप में भं० भगवन् के० कितने चं० चंद्र ५० प्रकाशे प० प्रकाशते हैं प० प्रकाशेंगे ए० ऐमे ज० जैसे जी• जीवाभिगम में जा• यावत् न० नव सशत
इति नवमसए पढमो उद्देसो सम्मत्तो ॥ ९ ॥ १॥ * * रायगिहे जाव एवं वयासी जंबुद्दीवेणं भंते! दीवे केवइया चंदा पभासिंसुवा पभासंति वा पभासिस्संतिवा, एवं जहा जीवाभिगमे जाव नवय सया पन्नासा तारागणकोडि
tag पंचभाग विवाह पण्णत्ति ( भगवती ) मूत्र 488
+4.0 नवना शतकका दूसरा
भावार्थ
नववा शतक का पहिला उद्देशा पूर्ण हुआ ॥२॥२॥ - - - -- । प्रथम उद्देशे में जम्बूद्वीप की वक्तव्यता कही. उस में ज्योतिषी प्रकाश करते हैं इस से ज्योतिषी का
कथन करते हैं. राजगृही नगरी के गुणशील नामक उद्यान में श्री श्रयण भगवन्त महावीर स्वामी पधारे है यावत् भगवान गौतम स्वामी पर्युपासना करते हुवे प्रश्न पुछने लगे कि अहो भगवन् ! इस जम्बूद्वीप में ही
कितने चंद्रने प्रकाश किया कितने चंद्र प्रकाश करते हैं, और कितने प्रकाश करेंगे ? अहो गौतम १०० 3. जम्बूद्वीप में दो चंद्रने गतकाल में प्रकाश किया, वर्तमान में करते हैं और अनागत में करेंगे वैसे ही दो
सूर्य तपे, वर्तमान में तपते हैं और आगे तपेंगे. १७६ ग्रह चार चले, चलते हैं व चलेंगे, एक लाख से तीस
द्देश 84.88