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________________ P3 RE १२१९ नाणाराहणा ? जहा उक्कोसिया नाणाराहणाय दसणाराहणाय भणिया तहा उक्कोसिया नाणाराहणाय चरित्ताराहणाय भाणियव्वा ॥ जस्सणं भंते ! उक्कोसियां दसणाराहणा तस्सकोसिया चरित्ताराहणा, जस्सुक्कोसिया चरित्ताराहणा तस्सुक्कोसिया दंसणाराहणा? गोयमा ! जस्स उक्कोसिया दंसणाराहणा तस्स चरित्ताराहणा उक्कोसावा, जहण्णावा, अजहण्णमणुक्कोसावा, जस्सपुण उक्कोसिया चरित्ताराहणा तस्स दसणाराहणा नियम उक्कोसा ॥ उक्कोसियाणं भंते ! नाणाराहणं आराहेत्ता कइहिं भवग्गहणेहिं सिज्झइ जाव अंतं करेइ ? गोयमा । अत्थेगइए तेणेव भवग्गहणेणं सिज्झइ जाव अंतंकरेइ, होती है और जिस को उत्कृष्ट चारित्र आराधना होती है उस को क्या ज्ञान आराधना होती है ? भावार्थ अहो गौतम ! जैसे उत्कृष्ट ज्ञान आराधना व दर्शन आराधना कही वैसे ही यहां कहना अर्थात् उत्कृष्ट ज्ञान आराधना में उत्कृष्ट चारित्र आराधना व मध्यम चारित्र आराधना होती है और उत्कृष्ट चारित्र आराधना में उत्कृष्ट, मध्यम व जघन्य ज्ञान आराधना होती है. अहो भगवन् ! जिस को उत्कृष्ट दर्शन 20 आराधना होती है उस को क्या उत्कृष्ट चारित्र आराधना होती है और जिस को उत्कृष्ट चारित्र आ-3 राधना है उस को क्या उत्कृष्ट दर्शन आराधना है ? अहो गौतम ! जिम को उत्कृष्ट दर्शन आराधना पंचभाग विवाह पण्णत्ति ( भगवती ) सूत्र 40887 4 आउना शतकका दशवा उद्देशा 988
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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