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शब्दार्थ
th अनुवादक बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषीजी
रहित म० मनुष्य आयुष्य क० कर्म जा. यावत् प० प्रयोग बंध दे देव आयुष्य क. कर्म शरीर पु०* पृच्छा गो० गौतम स० सराग संयम सं० संयमासंयम बा० अज्ञान त० तप कर्म से अ० अकाम निर्जरा
१०देव आयुष्य क. कर्म शरीर जा. यावत् प० प्रयोग बंध ॥ ४१॥ सु. शुभनाम कर्म स० शरीर पु. पृच्छा गो. गौतम का काया का• सरल भा०भाव का सरल भा० भाषाका सरल अविषवाद रहित
गोयमा ! पगइभद्दयाए, पगइविणीययाए, साणुक्कोसणयाए, अमच्छरियत्ताए मणुस्सा. उयकम्मा जावप्पओगबंधे ॥ देवाउयकम्मा सरीरपुच्छा ? गोयमा ! सरागसंजमेणं, संजमासंजमेणं, बालतवोकम्मेणं, अकामणिजराए देवाउयकम्मासरीर जावप्पओगबंधे ॥ ४१ ॥ सुभनामकम्मा सरीरपुच्छा ? गोयमा । काउज्जुययाए, भावुज्जुययाए,
भासुज्जुययाए, अविसंवादणाजोगेणं, सुभणामकम्मासरीरजाव प्पओगबंधे, यावत् मनुष्यके आयुष्य कार्मण शरीर प्रयोग बंध होता है. देवायुष्य कार्माण शरीरकी पृच्छा, अहो गौतमः . सराग संयम से, संयमासंयम से, अज्ञान तप कर्म करने से, व अकाम निर्जरा से यावत् देवायुष्य कार्मण शरीर प्रयोग बंध होता है ॥४१॥ अहो भगवन् ! शुभ नाम कार्मण शरीर प्रयोग बंध किस कर्म के उदय से होता है ? अहो गौतम ! काया की ऋजुता से, भाव (मन) की ऋजता से, भाषाकी ऋजुता से, जैसा कहे वैसा पीलने से यावत् शुभ नाम कार्मण शरीर प्रयोग बंध होता है. अशुभ नाम कर्म की पृच्छा. काया की
* भगाशक-राजाबहादूर लालामुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी *
भावा