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भावार्थ
48 पंचांग विवाह पणति ( भगवती ) सूत्र +8+
एवं समयं, देसबंधे जहण्णेमं एवं समयं उक्कोसेणं अंतोमुहुत्तं । रयणप्पभा पुच्छा ? गोयमा ! सव्वबंधे एकं समयं देसबंधे जहणणं दसवाससहरसाई, तितमय ऊणाई, उक्कोसेणं सागरोवमं समयूणं, एवं जाव असत्तमाए णवरं देसबंधे जस्स जा जहण्णिया टिई सा तिसमयऊणा कायव्वा जाव उक्कोसा समयऊणा ॥ पांचदिय तिरिक्खजोणियाणं मणुस्साणय जहा वाउकाइयाण, असुरकुमार नागकुमार (सेतीस सागरोपम ( देव नारकी में उत्कृष्ट स्थिति से उत्पन्न होता हुआ प्रथम समय सर्व बंधक फीर देश बंधक इस से समय कम हुआ ) वायुकाय का सर्व बंध एक समय और देशबंध जघन्य एक समय क्यों कि उदारिक शरीर से वायुकाय वैक्रेय शरीर को प्राप्त करे तव प्रथम समयमें सर्व बंध होता है और दूसरे समय में देशबंध होता है देशबंध होकर काल करे तो जघन्य एक समय की स्थिति कही. उत्कृष्ट अंतर्मुहूर्त अर्थात् जब अंतर्मुहूर्त तक वैक्रेय शरीर रहे तो उत्कृष्ट देश बंध की स्थिति. पीछे निश्चय हो उदारिक शरीर प्राप्त करता है. रत्नप्रभा पृथ्वी के नारकी का सर्व बंध एक समय का और देश बंध जघन्य तीन समय कम दश हजार वर्ष क्यों की जघन्य स्थिति से उत्पन्न होनेवाला नारकी विग्रहगति से दूसरे समय में अनाहारक व तीसरे समय में सर्व बंधक होता है इस से तीन समय कम किये, उत्कृष्ट एक समय कम सागरोपम क्यों कि उत्कृष्ट स्थिति वाले नारकी प्रथम समय में सर्व बंधक होते हैं. ऐसे
4 आठवा शतकका नववा उदेशा 808482
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