________________
शदार्थ |
सूत्र
भावार्थ
पंचमांग विवाह पण्णति ( भगवती ) सूत्र 400
{ होने का जा० यावत् उ० ऊंचे से ॥ १६ ॥ सरल शब्दार्थ || १७-१९ ॥ जं० जंबूद्वीप में मं० भगवम् सू० मूलेय दीसंति जात्र अत्थमण मुहुत्तांस दूरेय मुलेय दीसंति ? गोयमा ! लेस्सापडिघाएणं उग्गभण मुहुत्तंसिय दूरेय मूलेय दीसंति, लेस्साभितावेणं मज्झतिय मुहुत्तंसि, मूलेय दूरेय दीसंति, लेस्सापडिघाएणं अत्थमण मुहुत्तंसि दूरेय मूलेय दीसंति, सेतेणट्टेणं गोयमा ! एवं वुच्चइ जंबूद्दीवेणं दीवे सूरिया उग्गमण मुहुत्तंसि दूरेय मुलेय दीसंत जाव अत्थमण जाव दीसंति ॥ १७ ॥ जंबूद्दीत्रेणं भंते! सूरिया किं तीयं खेत्तं गच्छंति, पडुप्पण्णं खेत्तं गच्छंति, अणागयं खेत्तं गच्छति ? गोयमा ! नो तीयं खेत्तं गच्छंति, पडुप्पण्णं खेत्तं गच्छति, ना अणागयं खेत्तं गच्छति ॥ १८ ॥ जंबूद्दीवेणं भंते! {का तेज बहुत प्रबल रहता है. और तेज के प्रतिघात से अस्त होता सूर्य दूर होने पर भी पास दीखता है इस से अहो गौतम ! उदय काल में उगता हुवा सूर्य दूर होने पर पास दीखता है यावत् अस्त काल भी सूर्य पास दीखता है ॥ १७ ॥ अहो भगवन् ! जम्बूद्वीप में क्या सूर्य अतीत क्षेत्र को जाते हैं, (वर्तमान क्षेत्र को जाते हैं या अनागत क्षेत्र को जाते हैं ? अहो गौतम ! सूर्य अतीत क्षेत्र को नहीं जाते हैं क्यों की उस क्षेत्र को वे उल्लंघगये हुवे हैं, वर्तमान क्षेत्रको जाते हैं. और अनागत क्षेत्र को नहीं जाते हैं { ॥ १८ ॥ अहो भगवन् ! जम्बूद्वीप में सूर्य क्या अतीत क्षेत्र में प्रकाशते हैं वर्तमान क्षेत्र में प्रकाशते
आठवा शतक का आठवा उद्देशा 6888+
११५१