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शब्दार्थ ५० प्रत्यनीक प० प्ररूपे गो० गौतम त० तीन प० प्रत्यनीक इ० यह लोक प्रत्यनीक प० परलोक प्रत्य| नीक दु० दोनों लोक प्रत्यनीक ॥ २॥ स० समूा भं• भगवन् प० प्रत्यय क० कितने प० प्रत्यनीक गो.
गौतम त तीन प० प्रत्यनीक कु० कुल प्रत्यनीक ग. गण प्रत्यनीक सं० संघप्रत्यनीक ॥३॥ अ० अनुकंपा भं०भगवन् प०प्रत्यय क०कितने प• प्रत्यनीक गो गौतम त० तीन त तपस्वी प्रत्यनीक गिग्लान
पडिणीया पतं०इह लोगपडिणीए परलोग पडिणीए दुहलोग पडिणीए॥२॥समूहण्णं भंते! पडुच्च कइ पडिणीयाप० ?गोयमा! तओ पडिणीया प०तं. कुलपडिणीए, गणपडिणीए.
संघपडिणीए,॥३॥अणुकंपं भंते! पडुच्च कइ पडिणीया पुच्छा ?गोयमा! तओपडिणीया भावार्थ नीक ॥ १ ॥ अहो भगवन् ! गति आश्री कितने प्रत्यनीक कहें ? अहो गौतम ! गति आश्री तीन
प्रत्यनीक कहे. १ यह लोक प्रत्यनीक सो मनुष्य , लक्षण पर्याय का प्रत्यनीक पंचाग्नि साधक तपस्वी जैसे इन्द्रियार्थ के प्रतिकुलपना से, २ परलोक प्रत्यनीक सो इन्द्रियार्थ में तत्पर रहकर परलोक का भय, जाने नहीं ३ उभय लोक प्रत्यनीक चौरी प्रमुख से इस लोक व परलोक ऐसे दोनों लोक का मुख को नाश करे ॥ २ ॥ अहो भगवन् ! समूह समवाय आश्री कितने प्रत्यनीक कहे ? अहो गौतम ! समूह से
आश्री तीन प्रत्यनीक कहे १ चंद्रादिक कुलं का प्रत्यनीक २ कोटिकादि गण का प्रत्यनीक और ३ संघ का * प्रत्वनीक ॥ ३ ॥ अहो भगवन् अनुकंपा निमित्त कितने प्रत्यनीक कहे हैं ? अहो गौतम ! तीन प्रकार के
चारी मुनि श्री अमोलक ऋषिमी
प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेव सहायनी चालापतादजी *
4.8 अनुवादक-बाल