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* अनुवादक-बालब्रह्मचार। मुनि श्री अमोलक ऋपिजी 80%
पंचनाणाई तिणि अण्णणाई भयणाए ।दाणलडियाणं पंचनाणाई तिण्णि अण्णाणाई भयणाए । तस्स अलाद्धयाणं पुच्छा ? गोयमा ! नाणी नो अण्णाणी, नियमा एगनाणी-केवल नाणी ॥ एवं जाव वीरियलडिया अल.द्धिया भाणियव्वा शलवी रिय लद्धियाणं तिण्णि नाणाई तिण्णि अण्णाणाई भयणाए, तस्स अलद्धियाणं पंचनाणाई भयणाए । पंडिय वीरिय लद्धियाणं पंचनाणाई भयणाए, तरस अलद्रियाणं मणभजवनाणवज्जाई नाणाई अण्णाणाइं तिष्णिय भयगाए ॥ बालपंडिय वरिय लधियाणं तिणि नाणाई भयणाए । तस्स अलद्धियाणं पंचनाणाइं तिण्णि अण्णाणाइं भयणाए । इंदिय लद्धियाणं भंते ! जीवा किग्गाणी अण्गाणी? गोयमा ! चत्तारि नाणाइंतिगिय अगागाई भयणाए। तस्स अलद्धियाणं पुच्छा ? गोयमा ! नाणी नो अण्णाण नियमा एगनाणी-केवल
णाणी ॥ सोइंदिय लद्धियाणं जहा इंदिय लदिया तस्स अलद्धियाणं पुच्छा ? गोयमा! इन्द्रिय के लद्धिया में चार ज्ञान तीन अज्ञान की भजनाइसके अलद्धिया में केवल ज्ञान की नियमा. क्योंकि अनन्द्रिय केवल ज्ञानी ही होते हैं. श्रोत्रेन्द्रिय के लद्धिया में चार ज्ञान तीन अज्ञान की भजना उम के अलद्धिया में कितनेक को दो ज्ञान व कितनक को एक ज्ञान होता है. मति श्रुति ऐसे दो ज्ञानवाले विकले
* प्रकाशक-राजावहादुर लाला मुखदेवमहायजी मालामतादजी *
भावार्थ