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________________ शब्दार्थ ||शीविष क० कितने प्रकारका गो० गौतम च चारप्रकारका वि。 वृश्चिक जा० जाति आशीविषमं { मंडुक जाति आशीविष उ० सर्पजाति आशीविष म० मनुष्य जा० जाति आशीविष ॥ २ ॥बि० वृश्चिक जा० जाति आशीविषका मं० भगवन् के० कितना वि० विषय प० प्ररूपा गो० गौतम प० समर्थ वि० वृश्चिक जा० जाति आशीविष अ० अर्धभरत ५० प्रमाणमात्र बों० शरीर वि० विष वि० सूत्र भावाथ 408 अनुवादक - बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी तंजहा - जाइ आसविसाय, कम्म आसविसाय, ॥ १ ॥ जाइ आसीविसाणं भंते! कइविहा पत्ता ? गोयमा ! चउव्विहा पण्णत्ता, तंजहा - विच्छुयजाइ आसाविसे, मंडुक्कजाइ आसीविसे उरगजाइ आसीविसे मणुस्सजाइ आतीविसे, ॥ २ ॥ विच्छ्याइ आसीविसस्सणं भंते! केवइए विसए पण्णत्ते ? गोयमा ! पभूणं विच्छ्रय जाइ आसीवसे अद्धभरहप्पमाणमेत्तं बोदिं विसेणं विसपरिगयं || से सहस्त्रार देवलोक में देवतापने अहो भगवन् ! जाति आशीविष के १ उत्पन्न होवे और वहां अपर्याप्तावस्था में आशीविष होवे ॥ १ कितने भेद कहे हैं ? अहो गौतम ! जाति आशीविष के चार (भेद कहे हैं ? हृच्छिक जाति आशीविष २ मेंडक जाति आशीविष३ सर्प जाति आशीविष व ४मनुष्य जाति आशीविष || २ || अहो भगवन् ! वृश्चिक जाति आशीविष का कितना विषय कहां ? अहो गौतम ! अर्ध प्रकाशक - राजाबहादुर लाला सुखदेवसहायजी ज्वालामसादजी * १०३२
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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