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पंचमांग विवाह पण्णत्ति (भगवती) मूत्र 488
॥ २१ ॥ दो भंते ! दव्वा किं पओग परिणया, मीसापरिणया, वीससा परिणया ? गोयमा ! पओगपरिणयावा, मीसापरिणयावा, वीससा परिणयावा अहवा एगे पओग परिणए, एगे मीसापरिणए, अहवा एगे पओगपरिणए एगे वीससा परिणए, अहवा एगे मीसापरिणए एगे वीससापरिणए ॥ जइ पओग परिणया किं मणपओग परिणया, वयप्पओग परिणया, कायप्पओग परिणया ? गोयमा ! मणप्पओग परिणयावा, वयप्पओगपरिणयावा, कायपओगपरिणयावा ॥ अहवा एगे मणप्पओगपरिणए एगे वयप्पओगपरिणए, अहवा एगे मणप्पओगपरिणए, एगे कायप्पओगपरिणए,
अहवा- एगे वयप्पओगपरिणए, एगे कायप्पओगपरिणए ॥ जइ मणप्पओगपरिणया पुद्गलों का जानना ॥ २१॥ यह सब एक द्रव्य आश्रित अधिकार कहा. अब दो द्रव्य आश्रित प्रश्न करते हैं. अहो भगवन् ! क्या दो द्रव्य प्रयोग परिणत, मीश्र परिणत व वीस्रता परिणत हैं ? अहो
म! दो द्रव्य प्रयोग परिणत, मीश्र परिणत व वीस्रता परिणत है. अथवा एक प्रयोग परिणत मीश्र परिणत, एक प्रयोग परिणत एक वीस्रमा परिणत अथवा एक मीश्र परिणत एक वीवसा परिणत है यदि प्रयोग परिणत है तब क्या मन, वचन व काय प्रयोग परिणत है ? गौतम ! मन प्रयोग, वचन
आठना शतकका पहिला उद्देशा १६