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शब्दार्थी ३५० प्रयोग परिणत मी० मीश्रपरिणत वी० स्वभाव परिणत ॥ २॥ सरल शब्दार्थ
परिणयाय ॥ २॥ पओग परिणयाणं भंते ! पोग्गला कइविहा पण्णत्ता ? गोथमा ! पंचविहा प० तंजहा-एगिदिय पओग परिणया, बइदिय पओग परिणया, जाव ६० पंचिंदिय पओग परिणयाय । एगिदिय पओग परिणयाणं भंते ! पोग्गला कइविहा पण्णत्ता ? गोयमा ! पंचविहा पण्णत्ता तंजहा-पुढविकाइय एगिदिय पओग परिणया जाव वणसइकाइय एगिंदिय पओग परिणया । पुढविकाइय एगिंदिय पओग परिणयाणं भंते ! पोग्गला कइविहा पण्णत्ता ? गोयमा ! दुविहा पण्णत्ता,
तंजहा-सुहुम पुढत्रिकाइय एगिदिय पओग परिणयाय, बादर पुढवि काइय भावार्थ १३ स्वभाव से परिणमे सो वीस्रसा परिणत ॥ २॥ अहो भगवन् ! प्रयोग परिणत पुद्गल कितने प्रकार के
F कहें ? अहो गौतम ! प्रयोग परिणत पुद्गल पांच प्रकार के कहे हैं. एकेन्द्रिय प्रयोग परिणत यावत् ।
पंचेन्द्रिय प्रयोग परिणत. अहो भगवन् ! एकेन्द्रिय प्रयोग परिणत पुद्गल के कितने भेद ? अहो गौतम ! Fore एकेन्द्रिय पुद्गल परिणत के पांच भेद पृथ्वीकायिक प्रयोग परिणत यावत् वनस्पतिकायिक एकेन्द्रिय
प्रयोग परिणत. अहो भगवन् ! पृथ्वीकायिक एकेन्द्रिय प्रयोग परिणत पुद्गल कितने प्रकार के ? अहो 17 गौतम ! दो प्रकार के सूक्ष्म पृथ्वीकायिक एकेन्द्रिय प्रयोग परिणत व बादर पृथ्वीकायिक एकेन्द्रिय का
पण्णत्ति ( भगवती) सूत्र 428 पंचमांग विवाह
आठवा शतकका पहिला उद्देशा.
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