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॥ श्री वीतरागाय नमः ॥
६. श्री मुनिसम्मेलनके निर्णय । ___ संवत् १९९० फाल्गुन कृष्णा (चैत्रकृष्णा)-३ रविवार ता. ४ मार्च १९३४ के रोज श्रीराजनगर-अहमदाबाद शहरमें नगरशेठ श्रीमान् कस्तूरभाई मणिभाईके शुभ प्रयत्नसे और राजनगरके समस्त श्रीसंघके सम्मानपूर्ण आमंत्रणसे भिन्न भिन्न समुदायके मुनिमहाराजाका सम्मेलन आनन्दपूर्वक एकत्रित हुआ। जिसमें साडेचारसौ साधु, सातसौ साध्वीजी व अहमदाबादके हजारों श्रावकश्राविका मिलकर चतुर्विध श्रीसंघके उत्सबमें श्रीजिनेश्वरदेवकी स्नात्रपूजा पढाकर नगरशेठ श्रीमान् प्रेमाभाई हिमाभाईके वंडे में अहमदाबाद के श्रीसंघकी तरफसे तैयार कराये दुए भव्य मंडपमें समस्त साधुओंने एकटे मिलकर परस्परमें आनन्द-हर्ष स्वागत के साथ विचार विनिमयका प्रारंभ किया।
कितनीक मंत्रणा के पश्चात् ( इस मुनिसमुदायमें से ) तीस मुनियोका एक मंडल (समिति) कायम किया गया। इस | समितिने भिन्न भिन्न प्रश्नोमेंसे खास चर्चाके योग्य ग्यारह विषय रक्खे। ____ ग्यारह विषयका कच्चा मसोदा ( खरडा) (ड्राफट) तैयार करनेके लिये चार मुनियोंकी एक और पेटासमिति कायम करके, सर्वसम्मतिसे ग्यारह विषय उस समितिको सुपूर्द किये गए । उक्त समितिने अपना योग्य कार्य करके तीस (मुनिओं)की समितिको सुपूर्द किया।
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कच्चा मसोदा ( खरा योग्य ग्यारह विषय रक्खे। एक मंडल ( समिति ) कायम किया
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