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________________ १२ Jain Education International इस समितिने, चैत्र कृष्णा (वैशाखकृष्णा ) ६ तक ११ विषयों पर दीर्घ विचारणाके अंतमें सर्वसम्मति से किये हुए निर्णय, चैत्र कृष्णा (वैशाख कृष्णा ) ७ के रोज प्रातः काल में सर्वमुनिराजोंकी समक्ष जाहिर किये थे। ये निर्णय, भारतवर्षके सकल श्रीसंघको यहाँ निमंत्रित करके ( उसकी समक्ष ) प्रसिद्ध करनेका अपनने निश्चित किया था। परन्तु हालमें अपने शहरमें चलते 'मेनीनजाईटीस' रोगके उपद्रवके कारण वैसा करना अशक्य होनेसे अपन मजबूर हैं। इस लिये इन निर्णयोंकी नकल हरएक गांवके श्रीसंघको भेजनेका निश्चित किया है। उन निर्णयोंको प. पू. आचार्य श्रीमत् सागरानंदसूरीश्वरजी महाराज आप सबको पढकर सुनायेंगे। इस ऐतिहासिक एवं यशस्वी मुनिसम्मेलनकी अनेक विध विशिष्टताओं में से कितनिक विशिष्टताएं खास आदर्शरूप हैं। जैसे नौ वृद्ध महापुरुषोंने ११ विषयोंके निर्णय, किसी प्रकारकी विरुद्धताके बिना एकही मतसे, करके बहुतही उत्तम दृष्टांत खड़ा किया है ।—सम्मेलनके पहिले पक्षभेद व विचारभेदमें विभक्त होते हुए भी पू. मुनियोंने सम्मेलनके पंडालमें अपना आसन, मर्यादाके अनुकूल, ग्रहण किया था । वर्तमान समयमें प्रचलित प्रथा अनुसार, किसी भी सभापतिको नियुक्त न करते हुए, परापूर्वकी शास्त्रीय पद्धति अनुसार पू. आचार्यादि बडों के बहुमानको बराबर सम्हालते हुए ३३ दिन तक कार्य किया । हररोज प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयनेमीवरजी महाराज पुनीत श्री नवकारमंत्र से मंगलाचरण करके, पूर्णाहुति भी मंगलात्मक श्लोकसे करते थे। रोजके सिर्फ २ से ३ For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600251
Book TitleAkhil Bharatiya Jain Shwetambar Muni Sammelanne Sarv Sammati se Pattak rup me Kiye Hue Nirnay Vikram Samvat 1990 Year 1934
Original Sutra AuthorShree Sangh Rajnagar
Author
PublisherShree Sangh Rajnagar
Publication Year1934
Total Pages28
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript, Tithi, Devdravya, & History
File Size4 MB
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