SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 14
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ की समिति से अमुक अमुक आचार्य उठ गये इत्यादि बीनसत्तावार अनुचित खबरों पर विश्वास न रखते हुए जो शांति रक्खी. है, उसके लिये मैं अपनी समाजका ऋणी हूं। मुनिसम्मेलन शुरु होनेके पश्चात् कितनीक विचारणाके अंतमें फाल्गुनकृष्णा (चैत्र कृष्णा) ५ के रोज ७२ मुनिराजोंकी एक समिति कायम की गई थी। तत्पश्चात् कार्यकी सरलताके लिये फाल्गुन कृष्णा (चैत्र कृष्णा) ८ के रोज ३० मुनिराजोंकी समिति कायम करनेमें आई । और उस समितिने निर्णय करनेके लिये, फाल्गुन कृष्णा (चैत्र कृष्णा) १० के रोज ११ विषय विचारे, और उस बारेमें अपने निर्णयोंका मसोदा तैयार करनेका कार्य पू. आचार्य श्री विजयनंदनसरिजी, पू. पं. श्री रामविजयजी गणी, मुनिराज श्री पुन्यविजयजी और मुनिराज श्री चंद्रसागरजी-इन चार मुनिराजोंको चैत्र शुक्ला २ के रोज सुपूर्द किया था। उन्होंने सिर्फ दो ही रोजमें अपना तैयार किया हुआ मसोदा ३० मुनिराजोंकी समितिमें पेश किया था। इस मसोदेके उपर विचार करनेके लिये एक नई समिति कायम करनेकी आवश्यकता मालुम होने पर प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयनेमिसूरीश्वरजी, प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयवल्लभसूरीश्वरजी, प.पू. आचार्य श्रीमत् सागरानंदसूरीश्वरजी, प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयभूपेन्द्रसूरिजी, प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयसिद्धिमूरीश्वरजी, प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयनीतिसूरीश्वरजी, प. पू. आचार्य श्रीमद् विजयदानसूरीश्वरजी, प. पू. आचार्य श्रीमद् जयसूरीश्वरजी, पू. मुनिराजश्री सागरचंदजी-इन नौकी सबको बंधनकारक | निर्णयकरनेवाली समिति चैत्रशुक्ला ११ के रोज सर्वसत्ताके साथ नियुक्त हुई थी। in Education For Personal & Private Use Only www.ininelibrary.org
SR No.600251
Book TitleAkhil Bharatiya Jain Shwetambar Muni Sammelanne Sarv Sammati se Pattak rup me Kiye Hue Nirnay Vikram Samvat 1990 Year 1934
Original Sutra AuthorShree Sangh Rajnagar
Author
PublisherShree Sangh Rajnagar
Publication Year1934
Total Pages28
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript, Tithi, Devdravya, & History
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy