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________________ यह शुभ समाचार मालुम होते ही प्रस्तुत वर्षके कार्तिक शुक्ला त्रयोदशी के रोज अपने राजनगरके श्रीसंघके अग्रगण्य गृहस्थोंने मिलकर, श्रीजैन श्वेतांबर मुनिसम्मेलन यहां पर भरनेका आमंत्रण करने के लिये, परमपूज्य आचार्यदेव श्रीमद् विजयनेमिसूरीश्वरजी महाराजके पास जानेका निर्णय किया था। इस नीर्णय के अनुसार प्रस्तुत [चालु ] सालके पौष शुक्ला ६ के रोज मैं तथा और ३० गृहस्थ पालीताना गये, और वहां पर विराजते हुए प. पू. आचार्यादि मुनीवयोंसे भेट की । प. पू. आचार्यदेव श्रीमद् विजयनेमिसूरीश्वरजी महाराजने मुनिसम्मेलन के लिये फाल्गुण कृष्णा [चैत्र कृष्णा] ३ का शुभ मुहूर्त निकाल दिया। इसके पश्चात् मुनिसम्मेलनमें पधारने के लिये-लाठीदड, सुरत, धरमज, वढवाण,खंभात, पाटण, इन्द्रोडा, बामणवाडा, भीनमाल, सेरीसा, साणंद, वीरमगाम, बलाद, वटवा आदिस्थानोंमें और यहांपर भिन्न भिन्न उपाश्रयोंमें विराजते पूज्य आचार्य| देवादि मुनिवाँको आमंत्रण करनेके लिये कितनेक गृहस्थों के साथ मैं गयाथा. और हरेक स्थानमें सम्मेलनको आदरणीय बतलाया गया था । और मुनिसम्मेलनमें हाजिर होनेके बारेमें निश्चित तौरसे पूछने पर उन्होंसे उनकी धर्ममर्यादाके योग्य आशापूर्ण उत्तर मिले थे । और अपन देख सके हैं कि करीबन सब मुनिमहाराज यहां पधारे थे। ___ साधुसम्मेलन भरनेका अपना आमन्त्रण स्वीकृत होनेके पश्चात्. उसके लिये सब व्यवस्था करनेके लिये महाशुक्ल २ को यहां मिली हुई अपने श्रीसंघकी सभामें स्वागतमण्डल कायम किया गया था। इस स्वागतमंडलने कार्यकी सुव्यवस्थाके लिये वैग्यावच्च Join Education International For Personal & Private Use Only www.janelibrary.org
SR No.600251
Book TitleAkhil Bharatiya Jain Shwetambar Muni Sammelanne Sarv Sammati se Pattak rup me Kiye Hue Nirnay Vikram Samvat 1990 Year 1934
Original Sutra AuthorShree Sangh Rajnagar
Author
PublisherShree Sangh Rajnagar
Publication Year1934
Total Pages28
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript, Tithi, Devdravya, & History
File Size4 MB
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