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________________ विविध पूजन संग्रह ॥ १६६ ॥ आप की सेवाएं: आप श्री कई वर्षों से पीडवाडा शिवगंज में धार्मिक पाठशाला में धार्मिक अभ्यास करा रहे हैं । आप की पावन वाणी से एवं वीतराग के मार्ग का सही अध्यापन से कई बहनों के हृदय में वैराग्य भाव उत्पन्न कर दिये । उन्होंने नश्वर संसारिकता का त्याग कर चारित्र अंगीकार किया । शिवगंज एवं आस-पास गांवों में साधु-साध्वीओं जी के चातुर्मास एवं शेष काल में व्याकरणादि ग्रंथ एवं संस्कृत, प्राकृत का अभ्यास कराते रहते हैं । शुद्ध व स्पष्ट उच्चारण आप की विशेषता है। पूज्य आचार्य भगवतों एवं मुनिवरों का सदा आप को आशीर्वाद रहा । प्रत्येक विषय का अनुभव : आप ही एक ऐसे व्यक्ति है जो मात्र पढ़ना-पढ़ाना ही नहीं किन्तु प्रत्येक कार्य में आप का सुन्दर अनुभवित | ज्ञान है। पढ़ने-पढ़ाने के अतिरिक्त आपने बड़ी-बड़ी अंजनशलाकायें एवं प्रतिष्ठायें, पूजन आदि विधि विधान कराने में भी सक्षम है। "मन्यते-जायते आत्मा देशो अनेन इति मंत्र" अर्थात् जिसके द्वारा आत्मा का आदेश निजानुभव जाना जाये वह मंत्र । विधि विधानों में मंत्रों का सम्पादकीय परिचय ॥१६६॥ Jain Education International For Personal & Private Use Only www.ininelibrary.org
SR No.600250
Book TitleVividh Pujan Sangraha
Original Sutra AuthorChampaklal C Shah, Viral C Shah
Author
PublisherAnshiben Fatehchandji Surana Parivar
Publication Year2009
Total Pages266
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size21 MB
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