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________________ श्रीमलयगिरीया नन्दीवृत्तिः प्रतियोधकदृष्टान्तोमल्लकदृष्टान्तश्च सू. ३६ ॥१७७॥ असंखिजसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छंति?, एवं वदंतं चोअगं पण्णवए एवं वयासी-नो एगसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छंति नो दुसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छंति जाव नो दससमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छंति नो संखिजसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छंति असंखिजसमयपविट्ठा पुग्गला गहणमागच्छंति, से तं पडिबोहगदिटुंतणं । से किं तं मल्लगदि,तेणं?, मल्लगदिटुंतेणं से जहानामए केइ पुरिसे आवागसीसाओ मल्लगं गहाय तत्थेगं उदगबिंदुं पक्खेविजा, से नट्टे, अण्णेऽवि पक्खित्ते सेऽवि नहे, एवं पक्खिप्पमाणेसु पक्खिप्पमाणेसु होही से उदगबिंदू जे णं तं मल्लगं रावेहिइत्ति, होही से उदगबिंदू जे णं तंसि मल्लगंसि ठाहिति, होही से उदगबिंदू जे णं तं मल्लगं भरिहिति, होही से उदगबिंदू जे णं तं मल्लगं पवाहेहिति, एवामेव पक्खिप्पमाणेहिं पक्खिप्पमाणेहिं अणंतेहिं पुग्गलेहिं जाहे तं वंजणं पूरिअं होइ ताहे हुंति करेइ, नो चेव णं जाणइ केवि एस सदाइ ?, तओ ईहं पविसइ, तओ जाणइ अमुगे एस सद्दाइ, तओ अवायं पविसइ, तओ से उवगयं हवइ, तओणंधारणं पविसइ, तओ णं धारेइ संखिजं वा कालं असंखिजं वा कालं। से जहानामए केइ पुरिसे ॥१७७॥ २४ in Education Inter ne For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600244
Book TitleNandisutram
Original Sutra AuthorMalaygiri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1924
Total Pages514
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_nandisutra
File Size10 MB
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