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विरयस्स णं भंते! जीवस्स मायावत्तिया किरिया कज्जति १, गो० ! सिय कज्जति सिय नो कज्जति, पाणातिपातविरयस्स णं भंते ! जीवस्स अपच्चक्खाणवत्तिया किरिया कज्जति १, गो० ! णो इणट्ठे समट्ठे, मिच्छादंसणवत्तियाए पुच्छा, गो० ! णो इणट्टे समट्ठे, एवं पाणातिपातविरयस्स मणूसस्सवि, एवं जाव मायामोसविरयस्स जीवस्स मणूसस्स य, मिच्छादंसणसलविरयस्स णं भंते ! जीवस्स किं आरंभिया किरिया क० जाव मिच्छादंसणवत्तिया कि० क० १, गो० ! मिच्छादंससल्लविरतस्स जीवस आरंभिया कि० सिय क० सिय नो क०, एवं जाव अपच्चक्खाणकिरिया, मिच्छादंसणवत्तिया न क०, मिच्छादंसणसल्लविरयस्स णं भंते ! नेरइयस्स किं आरंभिया किरिया क० जाव मिच्छादंसणवत्चिया कि० क०१, गो० ! आरंभिया कि० क० जाव अपच्चक्खाणकिरियावि क०, मिच्छादंसणवत्तिया किरिया नो क०, एवं जाव थणियकुमारस्स, मिच्छादंसणसल्लविरयस्स णं भंते ! पंचिदियतिरिक्खजोणियस्स एवमेव पुच्छा, गो० ! आरंभिया कि० क० जाव मायावतिया कि० क०, अपञ्चक्खाणकि० सिय क० सिय नो क०, मिच्छादंसणवत्तिया कि० नो क० । मणूस स जहा जीवस्स । वाणमंतरजोइसियवेमा० जहा नेरइयस्स । एतासि णं भंते ! आरंभियाणं जाव मिच्छादंसणवत्तियाण य कतरे २ हिंतो अप्पा वा ४१, गो० ! सवत्थोवाओ मिच्छादंसणवत्तियाओ किरियाओ, अपच्चक्खाणकिरियाओ विसे०, परिग्गहियातो विसे०, आरंभियातो किरियातो विसे, मायावत्तियातो विसेसाहियातो ( सूत्रं २८७ ) ॥ पण्णवणाए बावीसतिमं पयं समत्तं ॥ २२ ॥
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