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________________ ११भाषा प्रज्ञापनाया:मलयवृत्ती. ॥२६॥ गंधाइंपि गेण्हइ, एवं दुब्भिगंधाईपि गेण्हइ, जाइं भावतो रसमंताई गेण्हति ताई किं एगरसाई गेण्हति जाव किं पंचरसाई गेण्हति ?, गो०! गहणदवाई पडुच्च एगरसाइंपि गेण्हति जाव पंचरसाइंपिगेण्हति सब्बग्गहणं पडुच्च नियमा पंचरसाई गेण्हति, जाई रसओ तित्तरसाई गेण्हति ताई कि एगगुणतित्तरसाई गिण्हति जाव अणंतगुणतित्तरसाइं गिण्हति ?, गो०! एगगुणतिताइपि गिण्हइ जाव अणंतगुणतिचाइपि गिण्हति, एवं जाव मधुररसो, जाई भावतो फासमंताई गेहति ताई किं एगफासाई गेण्हइ जाव अट्ठफासाई गिण्हति ?, गो० ! गहणदवाई पडुच्च णो एगफासाई गेण्हति, दुफासाई गिण्हइ जाव चउफासाई गेण्हति, णो पंचफासाई गेण्हति, जाव नो अट्ठफासाई गेण्हति, सव्वगहणं पडुच्च नियमा चउफासाई गेण्हति, तंजहासीतफासाई गेण्हति उसिणफासाई निद्धफासाई लुक्खफासाई गेण्हति, जाई फासतो सीताई गिण्हति ताई किं एगगुणसीताई गेण्हति जाव अणंतगुणसीताई गेण्हति ?, गो०! एगगुणसीताइपि गेहति जाव अणंतगुणसीताईपि गेहति, एवं उसिणणिद्धलुक्खाई जाव अणंतगुणाईपि गिण्हति, जाइं भंते ! जाव अणंतगुणलुक्खाई गेहति ताई किं पुट्ठाई गेण्हति अपुट्ठाई गेहति ?, गो० ! पुट्ठाई गेण्हति नो अपुट्ठाई गेण्हति, जाई भंते ! पुट्ठाई गेण्हति ताई किं ओगाढाई गेण्हति अणोगाढाइं गेण्हति ?, गो०! ओगाढाई गेण्हति नो अणोगाढाई गेण्हति, जाई भंते ! ओगाढाई गेहति ताई कि अणंतरोगाढाइं गेण्हति परंपरोगाढाई गेण्हति ?, गो० ! अणंतरोगाढाई गिण्हति नो परंपरोगाढाइं गेण्हति, जाई भंते ! अणंतरोगाढाई गेण्हति ताई भंते ! किं अणूइं गेण्हति बायराइं गेण्हति ?, गो० अणूइंपि गेण्हति बायराइंपिगेण्हति, जाई भंते ! अणूई गेण्हति ताई कि उड्डूं गेहति अधे गेण्हति तिरियं गेण्हति ?, गो० ! उड्डुपि गेहति अधेवि गेहति तिरियपि गेहति, R॥२६॥ Jain Education International For Personal & Private Use Only wwww.jainelibrary.org
SR No.600240
Book TitlePragnapanopangamsutram Part 01
Original Sutra AuthorMalaygiri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1918
Total Pages752
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_pragyapana
File Size14 MB
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