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________________ ॥६ ॥ ढाल मी॥ | वणकारा लाल चलण न देशुं ॥ एदेशी ॥ स्थान केवल ज्ञानी गुरुजी संयम आपो, कर्म कग्निकरां बंधन कापो, लाल के नवसिंधु माहे प्रव॥ Isalहण पाम्यो ॥ पुण्यसंयोगें में चरणे शिर नाम्यो ॥ लाल के ॥ १ ॥ संयम आपो | मुजने शिष्य करि थापो लाल ॥ के नृप हरिविक्रम लाल संयम लीधुं, सिंहतणी परे । नत्तम कारज की, लाल ॥ के० ॥ सुमति गुप्ति लाल रुडिपेरे पाले, पंचमहाव्रतकेरां दूषण टाले Salलाल ॥ के ॥ ॥ जयणासुं बोले लाल जयणासुं चाले । मुनिवर शुढे मार्गे महाले ॥ लाल sal NEIT के ॥ विनय वैयावच लाल करे गुरुनी सदा ॥ सदु मुनिवरमां जेणे सोहे नपा लालके॥३॥ आलस मुकी लाल विद्या अभ्यासे, मुनि हरिविक्रम ज्ञानी निजगुरुपासे ॥ लाल ॥ के॥ अनुक्रमें हादश लाल अंग अधीता, ज्ञानसहित करे किरिया विदिता लाल ॥ के ॥ ४ ॥ एकदिन देशनामे Sal Salनिजगुरु नाष्यो, वीश स्थानक तप अधिक प्रकाश्यो लाल ॥ के ॥ विधिसुं आराध्युं लाल बहु दुख कापे, परनवे त्रिनुवन पतिनी पदवी समापे लाल ॥ के ॥ ५ ॥ तेमांहे नवमुं लाल श्रानक salजाण्यु, सर्व संपदनुं कारण निश्चे वखाएयूं लाल ॥ के ॥ त्रिकरण शुई लाल समकित धरिये ॥ नमो दंसस्स एहनुं समरण करिये लाल ॥ के० ॥ ६ ॥ सांजली नवमुं लाल स्थानक धरिये, सर्वज्ञ नक्ति संघाते आदरिये लाल ॥ के० ॥ सदा निशंकित लाल आठ आचारें, शुद परिणाम Salपाले सुगुण विचारें लाल ॥ के ॥ ७ ॥ हरि विक्रम लालऋषि गुणलीणा, सर्वत्र नचित कृत्य प्रवी-II Kalyा लाल ॥के॥ निश्चल मनसूं लाल समकित पाले, मेरुतणी पेरे अमग न चाले लाल ॥ के G Vा॥६॥ अन्यदिवस लाल श्रीपुर गुरू आव्या, नव्य प्राणिना मनमें अधिक सुहाया लाल।।केणानरतत्राधिप देवसुदृष्टि, हररव्यो देखी मुनिनी करणी नत्कृष्टि लाल कणाणा समकित थिरता लाल गुण अव Jain Education International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600177
Book TitleVissthanakno Ras
Original Sutra AuthorShravak Bhimsinh Manek
Author
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages278
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size7 MB
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