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न नरएसु ॥३५॥ उसु काळ तश्याए, काऊ नीला य नील पंकाए॥धुमा य नीलकिण्हा, उसु किण्ह हुँति लेस्सा ॥५६॥ सुर नारयाण ता, दवल्लेस्सा अवघ्या नणिया॥नाव परावत्तीए, पुणएसिं हुंति बलेस्सा ॥३५॥ निरन बट्टा गप्नय, पजत्तसंखान लडिए पेसिं ॥ चक्कि हरिजुअल अरिहा, जिण जइ दिसि सम्मपुदविकमा ॥श्यनारयणाएदि गाजय, चत्तारि कुछ गुरु लहु क मेण ॥ पश् पुढवि गाउयई, हायर जा सत्तमि इग-इं॥२५॥(नरय दारं सम्म तं, मणुयदारं नमश्)॥७॥गननर ति पलियाक, ति गाऊ नकोस ते जदप्मेणं॥ मुचिम उदावि अंत मु, हु अंगुल असंख नागतणू॥२६॥बारस मुहुत्त गन्ने, श्यरे चनवीस विरह नक्कोसो ॥ जम्म मरणे सुसमर्ड, जहमसंखा सुरसमाणा ३६॥ सत्तमि महि नेरइए, तेक वाक असंख नर तिरिए॥ मुत्तण सेसजीवा नप्पङति नरनवम्मि॥२६शासुर नेर एहिंचिय, हवंति हरि अरिद चक्किबल
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