________________ श्रा० न०करे, ते ज्ञान विज्ञाने करी शोने, वली सघला सुखनुं कारण अन्ननुं दान , एवं वर्ग 6 मनमा नावीने यथाशक्ति वर्ष प्रत्ये साहामीवात्सल्य करे // 15 // // बांधव कुटुंब // 17 // 17" ने जे जमाडे, ते संसारनुं हेतु बे, अने तेहिज जो सरखा धर्मिने जमाडे, साहामी ज्ञानविज्ञानशोनितः // निदानं सर्वसौख्याना, मन्नपानं विनावयन् // साधर्मि / काणां वात्सल्यं, कुर्यान्नक्त्या समां प्रति // 15 // वात्सल्यं बंधुमुख्यानां, संसा रार्णववर्धनं // तदेव समधर्माणां, संसारोदधितारकम् ॥१६॥प्रतिवर्ष संघपूजा, शक्त्या कुर्याद्विवेकवान् ॥प्राशुकानि श्रीगुरुन्यो, देयास्त्राणि नक्तितः॥॥ सत्पात्राशनयानानि, पात्रवस्त्रौषधानिच॥चैन्न पर्याप्तविनवो, देयात्तदपिशक्तितः || वात्सल्य करे, तो ते संसार समुज्नुं तारक // 16 // // वर्ष प्रत्ये श्रीसंघनी पधरा मणी नक्ति पोतानी शक्तिमाफक करे, तथा फाशु शुद्धमान एवां वस्त्रादिक गुरुने // 117 // निक्तियें करी आपे // 17 // // तथा उत्तम पात्रने विषे अशन, पान, खादिम, स्वा JainEducationalal For Personal and Private Use Only