________________ थान || गुणुं धन थाय, क्षेत्रमा वावियें ते सोगुणुं थाय, अने सुपात्रने श्रापीये ते अनंतयु वर्ग 6 पाणुं थाय // 7 // // देरासर, प्रतिमा, पुस्तक, साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविकाए सात देत्रने विषे घणां फल पामवाने अर्थे धन वावरे // // // नगवंतनां नक्तिनाव श्री जे देरासर प्रत्ये करावे, ते पुरुष धन्य बे, ते देरासरना परमाणुनी जेटली संख्या गुणं नवेत् // 7 // चैत्यप्रतिमापुस्तकश्रीसंघनेदयुक्तेषु॥ देवेषु सप्तसु धनं, व्ययेनूरिफलाप्तये // // चैत्यं च कारयेऽन्यो, जिनानां नक्तिनावितः // तत्प रमाणुसंख्यानि, कल्पानेष सुरो नवेत् // ए॥ यत्कारितं चैत्यगृहं, तिष्ठेद्यावद्दिा नानि द // स तत्समयसंख्यानि, वर्षाणि त्रिदशो भवेत् // 20 // सुवर्णरूप्य Kले तेटला पठ्योपम सुधी ते पुरुष देवतानुं श्रायु जोगवे // ए॥ // जे देरासर करा allव्युं, ते देरासर जेटला दिवस सुधी रहे तेटला वर्ष पर्यंत ते पुरुष देवतापणे रहे // 10 // men सोनानी, रूपानी, पाषाणनी, रत्ननी, मृत्तिकानी एवी जगवंतनी प्रतिमा प्रत्ये जे पुरुष Jain Educational For Personal and Private Use Only Mainelibrary.org