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________________ कर्म० 11 99 11 ग निरय तिरि नामा ॥ संखि इमे सेसे, तप्पा गान खीयंति ॥८२॥ इ तो हाइ कसाय, ठगंपि पचा नपुंसगं इवी ॥ तो नोकसाय बक्कं, बुझइ संज कोहम्म ॥८३॥ पुरिसं कोढे कोहं, माणे माणं च बुदइ मायाए ॥ मायं च बुदइ लोहे, लोहं सुदुमंपि तो हाइ ॥ ८४॥ खीण कसाय 5 चरिमे, निदं प यलं च दिइ बनमो ॥ आवरणमंतराए, बनमचो चरम समयंमि ॥८॥ | देवगइ सहगया, डु चरिम समयम्मि नवि खीच्यंति ॥ सविवागे पर ना मा, नीच्या गोपि तचेव ॥८६॥ अन्नयर वेणिं, मणुन मुच्चगोय | नवनामे || वेइ जोगि जिणो, नक्कोस जहन्न मिक्कारे ॥८७॥ म गइ जा इ तस बा, यरं च पत्त सुनगइ ॥ जस कित्ती तियरं, नामस्स दवंति नव प्रा ||GG || तच्चाणुपुवि सदिया, तेरस व सिद्धिस्स चरमंमि ॥ सं तं सग मुकोसं, जहन्नयं बारस हवंति ॥ ॥ मणु गइ सहगयार्ज, जव खि Jain Educationanal For Personal and Private Use Only ग्रंथ ६ 11 99 || lainelibrary.org
SR No.600176
Book TitleLaghu Prakaran Sangraha
Original Sutra AuthorShravak Bhimsinh Manek
Author
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year
Total Pages222
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size19 MB
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