________________
Nउरलवंगेसु ॥ तित्ती सयरा परमो, अंत मुह लह विान जिणा ॥६॥ इति ।
स्थितिबंधः॥ तिवो असुद सुदाणं, संकेत विसोदि उविवङय॥मंदरसोगि । र मदिरय, जल रेदा सरिस कसाएटिं।६३॥चन गणार असुदो, सुदन्नदा
विग्घ देस आवरणा ॥ पुम संजलणिग उति चन, गण रसा सेस उगमाशा N६॥ निबुश्चरसो सहजो, उति चन नाग कढि इक्क नागं तो ॥ग गणा लाई असुदो, असुहाण सुदो सुदाणं तु ॥६॥ तिवमिग थावरायव, सुर मिला विगल सुहम निरय तिगं ॥ तिरि मणुाज तिरिनरा, तिरि उग बेवक सुर । निरया ॥६६॥ विनवि सुराहारग उग, सुख गइ वन्न चन तेय जिण सायं।स मचन परघा तस दस, पणिंदि सासु च खवगाज ॥६॥ तमतमगा नकोयं, सम्मसुरा मणुय उरख दुग वरं ॥ अपमत्तो अमरान, चन गइ मिबान से साणं ॥६॥ थीण तिगं अण मिबं, मंद रसं संजमुम्मुदो मिडो॥ बिय तिय।
Jain Education
For Personal and Private Use Only
P
w
.jainelibrary.org