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|जिअ जो,गु वांग लेसाय बंधहेक य॥ बंधाश्अ चन अप्पा, बहुं च तो नाव संखाई॥४॥ (पागंतरं ) चनदसगुणगणेसु, जियजोगुवढंग लेसबंधाय ॥ बंधुद दीरणा, संतप्पबहुत्तदसगणा ॥४॥ दार गाहा ॥ अथ जी वस्थानानि नच्यन्ते ॥ श्द सुहुम बायरेगिं, दि वि ति चन असन्नि सन्नि पं. चिंदी ॥ अपजत्ता पत्ता, कमेण चनदस जिअहाणा ॥ ५॥ बायर अस। नि विगले, अपजि पढम बिअसन्नि अपजत्ते ॥ अजय जुञ सन्निप, सत्वगुणा मित्र सेसेसु॥६॥ अपजत्त नक्कि कम्मु र, ल मीस जोगा अपऊ सन्नीसु ॥ ते सवि नवमीस एसु, तणु पसु उरलमन्ने ॥ ७॥ सवे सन्नि । पजत्ते, उरखं सुहुमे सनासु तं चनसु ॥ बायरि सविनवि उगं, पज सन्निसु बार उवगंगा ॥ ॥ पज चरिंदि असन्निसु, ७ दंसअनाण दससु चस्कु |विणा ॥ सनिअपले पण ना, चरकु केवल उग विहूणा ॥ ए॥ सन्नि
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