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________________ अवचुरी:-जयकीर्तिसू रिना शिष्य श्रीक्षमारत्नजीए रची छे. जे अहीं आ ग्रंथरूपे छे प्रसिद्ध करवामां आवे छे. बीजी एक वृत्ति जेना कर्तानो निर्देश नथी तेवी चार हजार श्लोकप्रमाण छे. ते जेसलमेर, पाटण, सूरतना भंडारोमां उपलब्ध थशे. गुजराती भाषांतर:-मलयगिरिजीनी वृत्ति सहितनुं गुजराती भाषांतर मुनिमहाराज श्रीहंससागरजी महाराज संस्कारित करी रह्या छे. जे श्रीहंससागरजी म.ना पुष्पमा प्रसिद्ध थवा संभव छे. शिला-ताम्रपत्र:-पालीताणा आगममंदिरमां अने सूरत ताम्रपत्रआगममंदिरमा पिंड नियुक्ति मूळ मात्र क्रमे शिलामां अने ताम्रपत्रमा आरूढ थयु छे. आ उपर प्रमाणेनुं पिण्डनियुक्ति प्रन्थना अंगेनुं प्रोफेसर वेलनकरनुं मंतव्य जिनरत्नकोषना आधारे लख्युं छे. ___ आ पिण्ड नियुक्ति अवचुरीने छपाववा माटे आगमोद्धारक आचार्य श्रीआनंदसागरसूरीश्वरजीना शिष्य मुनिमहाराज श्रीगुणसागरजी महाराजे प्रेसकोपी आपी हती अने मुनिराज कंचनविजयजी तथा मुनिराज क्षेमंकरसागरजी महाराजने आ ग्रंथ संपादननु कार्य सोंप्यु हतुं, परंतु बेत्रण फरमा जेटलुं कार्य थतां मुनि श्रीक्षेमकरसागरजीन स्वर्गगमन* थतां बाकीजें बधुं कार्य मुनि कंचनविजयजीने ज पूरे करवू पडयुं छे. * संपादन कार्य चालतु हतुं ते अरसामां हींगनघाटथी कपडवणज आवतां खडाली सुकामे (कपडवणजथी १५ माइल दूर) २०११ ना चैत्र वदी .)नी रात्रे अगीयार वागे झेरी जानवरना डंखथी मुनिश्रीक्षेमकरसागरजी अवसान पाम्या. तेओ उत्साही संशोधक मुनि हता. तेओश्री आचार्य Jain Education Inter16 For Private & Personel Use Only C ww.jainelibrary.org
SR No.600106
Book TitlePind Niryukti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManekyashekharsuri, Kanchanvijay
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1968
Total Pages396
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_pindniryukti
File Size17 MB
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