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प्रकाश
कीयनिवेदन।
पिण्ड
क्षमा
आ ग्रंथना गाथाना अकारादि बिगेरेनां परिशिष्टो आठ आपेलां छे, तेमज अमुद्रित साहित्य तरीके जे वीरगणिए आनी सुपर रत्नीया- |शिष्यहिता नामनी टीका रचीछे तेनो आदि अने अंत भाग परिशिष्ट नवमामां आपेल छे. जो के आखी टीका छपाय ते तो सारं वर्युपेता ज कहेवाय. बळी माणेक्यशेखरनी करेली दीपिका अमो मेळवी शक्या छीए, तेनो पण आदि अने अंत भाग परिशिष्ट दशमामां श्री- आप्यो छे. आवी रीते ते ते ग्रंथोमां तेनुं संपूर्ण साहित्य आप, उचित गणीये छीए.
विनंति-अमारी आ संस्था हालमां आगम पंचांगीना अप्रगट ग्रंथो प्रगट करवानी भावना राखे छे. जेथी श्रीश्रमणनियुक्ति। संघने अमारी विनंति छे के जेओनी पासे तेवा ग्रंथोनी प्रेसकोपीओ होय, अगर अमे जे नामावळी अप्रगटनी बहार पाडी छे,
ते सिवायनो कोई ग्रंथ पंचांगीमांनो अप्रगट जाणमां होय तो अमोने जणावे. जे मुनिराजाओने ते ग्रंथो पैकी कोई ग्रंथ संपादन ॥४॥
करवानी ईच्छा होय तो अमने जणावे, के जेथी अमारी आ संस्था ते कार्यमां आपनो सहकार ले अने बने तेटला वधारे ग्रंथो प्रगट करी शके.
__ आ ग्रंथना पृष्ठ १२० मा जे पुष्पिका बीजी मूकी छे, ते आचार्य श्रीकमळसूरिपुस्तकोद्धारकफंड तरफथी जेसलमरनी प्रत उपरथी उतरावेली प्रतनी छे. आ रीते आ फंड तरफथी उतरावेली प्रतो छपाववाना उद्यमनी जरुर छे. जेमां अनेक अप्रगट ग्रंथो श्रीआनंदसागरसूरीश्वरजीना समुदायमां उगता भानु समा हता. तेओश्रीए अमारी संस्थाना पण नीचे प्रमाणेना प्रकाशनोमा मुनिश्रीकंचनविजयजीनी साथे संपादनकार्य कयु छः-पंचाशकचूर्णी, वंदनप्रतिक्रमणअवचुरी, दशवकालिकअवचुरी, अल्पपरिचितसैद्धान्तिकशब्दकोश भा० १लो. आ माटे संपादकीए तेमना अंगे जुदी फुटनोट लखी छे, अमारी संस्था पण तेमना अवसान बदल खेद जाहेर करे छे भने तेमना आत्मानी शांति इच्छे छे.
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