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________________ क्षमारत्लीया संपादकीय निवेदन। वच्युपेता श्री. पिण्डनियुक्तिः। LAN ॥ ७॥ पणानो विषय छे. क्रमे गाथा ७२, ४०३, ५१५, ६२८, अने ६७१ मीए ते विषयो पूरा थाय छे. परिशिष्ट १-८-पिंडनियुक्तिनी अंदर आ विषय उपरांत संपूर्ण विषयनी माहिती मळी शके ते माटे ग्रंथनी शरुआत पहेला नंदीआदिना विषयानुक्रमना आधारे विषयानुक्रम आपवामां आव्यो छे. आ अवचूरिने अंगारवा माटे तेमज अंदर आवेली वस्तुओनी माहीती मळे ते हेतुधी अवचूरि पछी आठ परिशिष्टो आपवामां आवेलां छे. ते आ प्रमाणे १-गाथाओने अकारादिक्रम, २-भाष्य गाथानां प्रतीक, ३-साक्षी ग्रन्थो, ४-साक्षी पाठोनो अकारादि, ५-व्याकरणआदि, ६-'अन्ने' विगेरे, ७-नामोनो अकारादि अने ८-उदाहरणोनां नामादि. परिशिष्ट ९-वीरगणिनी शिष्यहिता नामनी वृत्तिनो आदिअंत भाग अहिं परिशिष्ट ९ मां आपवामां आव्यो छे. तेनी मूळ प्रत पाटणना भंडारनी मूळ माथा सहितनी वृत्तिवाळी छे. आ प्रत पडिमात्रानी छे परंतु एटली बधी अशुद्ध छे के मारा क्षयोपशमना आधारे बने तेटली शुद्धि करतां पण एमां अशुद्धिओ पारावार रहेवा पामी छे, तो विद्वद्जनो बीजी प्रतनो समन्वय करीने शुद्ध करशे, एवी आशा तो जरुर रखाय. अवचूरिनी अंदर परिशिष्ट तरीके विशाळकाय वृत्तिनो आदि अंतभाग आपको ए खरेखर व्याजबी नथी, परंतु आ पण एक अद्यावधि अमुद्रित भंडारोमा सुरक्षित रहेली प्रत छे, एम जणाववाने माटे ए अयोग्य न गणाय. परिशिष्ट १०-अंचलगच्छीय श्रीमेरुतुंगसूरिना शिष्य श्रीमाणिक्यशेखरमूरिए जे दीपिका रची छे, तेनो आदि अने अंतभाग | आना परिशिष्ट१०नी अंदर आपवामां आव्यो छे. दीपिकाकार पोते ज ए वात जणावे छे के मलयगिरि महाराजनी Jain Education Interi For Private & Personel Use Only Twww.jainelibrary.org
SR No.600106
Book TitlePind Niryukti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManekyashekharsuri, Kanchanvijay
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1968
Total Pages396
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_pindniryukti
File Size17 MB
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