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________________ क्षमा संपादकीय रत्नीया | निवेदन। वचूर्युपेता श्री. पिण्ड नियुक्तिः। हती तेने पण प्रेसकोपी शुद्ध करती वखते साथे राखवामां आवी हती. जो के जेसलमेर उपरथी उतरावेली प्रत घणीज अशुद्ध हती, परंतु पाटणनी जे प्रत उपरथी प्रेसकोपी थई हती, ते प्रतमां कोई कोई जग्याए पाठो पडेला हता जे फंडनी प्रतमा हता. आथी ते पाठो चालुमा जरुरी छे एम मानि अमे ते पाठोने <> आQ चिह्न आपी चालु अवचुरीमा आप्या छे. गाथाओनी तुलना:-अवचुरीकारे अने टीकाकारे जे गाथाओ मानी छे, तेनो सन्तुलन आ रीते पाय छे. पिण्डनियुक्तिमा नियुक्ति गाथा ६७१ छे, भाष्य गाथा ३७ छे अने अनिर्दिष्टांक गाथा २ छे. वीरगणिनी जे टीकावाली प्रत छे, तेमां गाथाओ आखी आपवामां आवी छे. अने भाष्य तेमज नियुक्तिनी गाथाना संलग्न अंक आपवामां आव्या छे. समजुतिः-गाथा २४२ (पृष्ठ ४८) पछी "छक्कायए" एम अवचुरीकारे गाथा मानी छे. पण ते गाथा आखी आपी नथी. गाथा ३९१ ( पृष्ठ ७३ ) "छन्नमि" गाथा कोइ जगाए देखाती नथी एम अवचुरिकार कहे छे, पण मलयगिरि महाराजे तेमज वीरगणिए तेनी व्याख्या करी छे. गाथा ५४४ (पृष्ठ १००) नी टीकामां “पयसम" एम करीने अडधी गाथा अवचुरीकारे साक्षिमा आपी छे, पण मलयगिरि महाराजे मानेली गाथाओनी साथे आ गाथानो क्रम राख्यो छे तेथी फुटनोटमा संपूर्ण गाथा आपी छे अने तेनो। अंक पण लीधो छे. १ जुओ मलयगिरिटीका पत्र ११६. Jain Education Inteme For Private & Personel Use Only A w.jainelibrary.org
SR No.600106
Book TitlePind Niryukti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManekyashekharsuri, Kanchanvijay
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1968
Total Pages396
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_pindniryukti
File Size17 MB
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