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संपादकीय निवेदन
क्षमारत्नीयावचूर्युपेता
संपादकीय निवेदन।
भी
पिण्ड
नियुक्तिः।
श्रमण भगवान महावीर महाराजना शासनमां शासननी स्थापना वखते द्वादशांगीनी रचना कराई, तेमज समये समये चौद पूर्वधर विगेरेए अनेक आगमो रच्या. तेनी अंदर शासन ज्यां सुधी चाले त्यां सुधी एटले के लगभग पांचमा आराना छेडा सुधी आवश्यक क्रिया विगेरे साधुनो आचार रहे, आथी जे सूत्रो आवश्यक उपयोगी तेवा चार सूत्रो जे दीर्घकाल रहेवानां छे, तेने मूळसूत्र तरीके संज्ञा आपी. तेनी अंदर आवेला श्रीदशवकालिकसूत्रनी श्रुतकेवली मनकना पिता श्रीशय्यंभवसूरिए रचना करी छे.
आ श्रीदशवकालिकनी अंदर छ महिना शेष आयुष्यवाळा एवा आठ वरसना मनकमुनि भणी शके अने समजी शके तेवी सरळ रचना कराइ छे. तेमा दश अध्ययनो छे अने पाछळथी बे चुलिकाओनो उमेरो थयो छे. आ श्रीदशवकालिक उपर श्रीभद्रबाहुस्वामी महाराजे नियुक्ति रची. तेमां पांचमुं अध्ययन पिण्डैषणा छे. जेमा साधुने आ शरीर टकाववाने माटे, संयम पाळवाने माटे आहारनी जरूर पड़े तेथी आहार कया प्रकारे लाववो जोइए ते विगेरे व्यवस्थानी साधुने जरुर रहे. तेने जणावनार आ अध्ययन छे. ___आथी श्रीभद्रबाहुस्वामी महाराजे आ अध्ययननी विस्तारपूर्वक नियुक्ति करी अने विस्तारपूर्वकनी नियुक्ति होवाना कारणे जुदा ग्रंथ तरीके ते राखी, तेनु पिण्डनियुक्ति एवं नाम राख्युं.
श्रीमलयगिरि महाराजनी टीका साथेनी पिंडनियुक्ति आ संस्थाए विक्रम सं. १९७४ मां आगमोद्धारक गुरुदेवश्री पासे 2 संपादन करावी हती. पिण्डनियुक्ति उपरनी आ अवचुरी छे. अवचुरीका श्रीमानक्षमारत्नजीए रची छे. अवचुरीनो उपसंहार
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