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जीवा वागरिया भयवया ते उ ॥३॥ ताहे पुणोऽवि पुच्छइ भरहे वासंमि अस्थि पुण कोई । एए निओयजीवे जो साहइ पुच्छिओ संतो ॥ ४ ॥ तित्थयरेणं भाणियं संति तहिं अज्जरक्खिया सरी । तो सो माहणरूवेण आगओ ताण पासमि ॥ ५॥ गोयरचरियाएँ विणिग्गएसु साहस थेररूवेणं । अभिवदिऊण पभणइ-महल्लवाही मह सरीरे ॥६॥all
तो कत्तियं ममाउं कहेह काऊण अणसणं जेण | मुंचामि इमे पाणे निविण्णो जीवियवाओ ॥ ७ ॥ तं सोउं INउवउत्ता जाया सूरी तओ य वाससयं । नाऊण समहियं से चिंतंति न भारहो एसो॥८॥ खयरो व वंतरो वा,
होही नाया तओ य तस्स ठिई । दो सागरोवमाई, भणंति तो होसि तं सक्को ॥ ९॥ सम्भावं तो साहइ इंदोल संपुच्छए निओए य । कहिएसु सूरिणा तेसु पत्थिओ वंदिउं जाव ।। १० ॥ भणिओ स ताव गुरुणा, चिट्ठ खणं जाव साहुणो इंति । तुह दसणेण जेणं थिरयरया हंति ते धम्ने ॥ ११ ॥ इंदो पभणइ ते अप्पसत्तभावेण चेव मं दटुं । काहिंति नियाणमओ अदंसणं चेव मे सेयं ॥ १२ ॥ जइ एवं ता अण्णं चिण्डं काऊण किंपि बच्चाहि । तो अन्नत्तो दारं काउं वसहिं गओ सक्को ॥१३॥ गोयरचरियनियत्ता साहू वसहीए दारमलहंता । वाहरिया सूरीहिं.इओमुहा एह भणिरेहिं ॥ १४ ॥ कहियं सक्कागमणं चताण ता कीस दंसिओ नऽम्हं? । इय भणिए आइडं तं
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