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________________ कथा श्रीनवबृह- पुरवरे आसि नीइसंपण्णो । नामेण महासयगो सेट्ठी सुविसिरिद्धिजओ ॥ ४॥ तहाहि-तस्स निहाणकलंतरवव- गुणद्वार में वृत्ता हाशतक संलेखनायां | हारनिउत्तदविणकोडीऔ । अट्ठट्ठ अट्ठ दस दससहस्समाणा य गोवग्गा ॥५॥ तस्स तेरस भज्जाओं नियनियस्वेण निज्जियरईओ । रेवइपमुहाउ तासि नियनियमह दविणपरिमाणं ॥ ६॥ पत्तेयं साहिज्जइ रेवइए तत्थ अट्ठी कोडीओ। दव्वस्स अट्ट वग्गागावीणं दसदससहस्सा॥७॥ एकेदम्मकोडी सेसाण दुवालसण्ह महिलाणं। दसदसगोसाहस्सो एकेको तह य गोवग्गो॥ ८॥ एसोय ताण पिइकुललडो बिहवो वियाणियब्वोत्ति । एवं वच्चंतमि य काले अह वीरजिणनाहो॥९॥गुणसिलए उज्जाणे समोसढो तस्स देसणं सोउ।संजायधम्मसद्धो महसयगो सावओ जाओ ॥१०॥ निच्चलसम्मदिट्ठी जहभणियपरिग्गहपरीमाणो । मोत्तं तेरस भज्जाओं तह य परिहरियथीसंगो॥ ११ ॥ एवं सेसवयाणंपि उचियभंगेण विहियपरिमाणो । विविहाभिग्गहधारी पियढधम्माइगुणजत्तो ॥ १२॥ अहिगयजीवाजीवाइनवपयत्थो पसत्थझाणरओ। निग्गंथे पडिलाहइ फासुयएसणियदव्वेहि ॥ १३ ॥ रेवइभज्जा उण तस्स मज्जमंसप्पियासया चेव । सुहमप्पणोच्चिय परं इच्छंती चिंतए एवं ॥ १४ ॥ सव्वाओ सवत्तीओ माराविय तासि गो-||॥ ३१ ॥ ||| उलाइ धणं । सयमंगीकाऊणं भुंजामि निराउला भोए ॥ १५ ॥ एवं विचिंतिऊणं, कयाइ छण्हं विसप्प-| For Private 8 Personal Use Only Jain Education lwww.jainelibrary.org
SR No.600105
Book TitleNavpad Prakaranam
Original Sutra AuthorYashovijay Upadhyay
Author
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1927
Total Pages710
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size14 MB
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