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________________ चउक्के सत्त जोयणसताई आयामविक्खंभेणं बावीसं तेरसोत्तरे जोयणसए परिक्खेवेणं। छट्टचउक्के अट्ठजोयणसताई आयामविक्खंभेणं पणुवीसं गुणतीसजोयणसए परिक्खेवेणं । सत्तमचउक्के नवजोयणसताई आयामविक्खंभेणं दो जोयणसहस्साइं अट्ठ पणयाले जोयणसए परिक्खेवेणं । जस्स य जो विक्खंभो उग्गहो तस्स तत्तिओ चेव । पढमाइयाण परिरतो जाण सेसाण अहिओ उ ॥१॥ सेसा जहा एगुरूयदीवस्स जाव सुद्धदंतदीवे देवलोकपरिग्गहा णं ते मणुयगणा पण्णत्ता समणाउसो! ॥ कहि णं भंते! उत्तरिल्लाणं एगुरूयमणुस्साणं एगुरुयदीवे णामं दीवे पपणते?, गोयमा! जंबूहीवे दीवे मंदरस्स पब्वयस्स उत्तरेणं सिहरिस्स वासधरपव्ययस्त उत्तरपुरच्छिमिल्लाओ चरिमंताओ लवणसमुई तिणि जोयणसताई ओगाहित्ता एवं जहा दाहिणिल्लाण तहा उत्तरिल्लाण भाणितव्वं, णवरं सिहरिस्स वासहरपव्वयस्स विदिसासु, एवं जाव सुद्धदंतदीवेत्ति जाव सेत्तं अंतरदीवका ॥ (सू० ११२)। से किं तं अकम्मभूमगमणुस्सा?, २ तीसविधा पण्णत्ता, तंजहा-पंचहिं हेमवएहिं, एवं जहा पण्णवणापदे जाव पंचहिं उत्तरकुरूहिं, सेत्तं अकम्मभूमगा। से किं तं कम्मभूमगा?, २ पपणरसविधा पण्णत्ता, तंजहा-पंचहिं भरहेहिं पंचहिं एरवएहिं पंचहिं महाविदेहेहि, ते समासतो दुविहा पण्णत्ता, तंजहा-आयरिया मिलेच्छा, एवं जहा पण्णवणापदे जाव सेत्तं आयरिया, सेत्तंगम्भवतिया, सेत्तं मणुस्सा॥ (१० ११३) Jain Education in For Private Personal Use Only w.jainelibrary.org
SR No.600089
Book TitleJivajivabhigamopanga Sutra
Original Sutra AuthorChaturdash Purvadhar
AuthorMalaygiri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1919
Total Pages938
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_jivajivabhigam
File Size20 MB
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