SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 281
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ नव ओवासंतराई' इति वक्तव्यं शेषं तथैव, उक्तश्च-'जावइ उदेइ सूरो जावइ सो अस्थमेइ अवरेणं । तियपणसत्तनवगुणं काउं| पत्तेय पत्तेयं ॥ १॥ सीयालीस सहस्सा दो य सया जोयणाण तेवढा । इगवीस सट्ठिभागा कक्सङमाइंमि पेच्छ नरा ॥ २ ॥ एवं दुगुणं काउं गुणिजए तिपणसत्तमाईहिं । आगयफलं च जं तं कमपरिमाणं वियाणाहि ॥ ३ ॥ चत्तारिवि सकमेहिं चंडादिगईहिं जति छम्मासं । तहवि य न जंति पारं केसिंचि सुरा विमाणाणं ॥ ४॥” अस्यां तृतीयप्रतिपत्तौ तिर्यग्योन्यधिकारे प्रथमोद्देशकः ।। उक्तः प्रथमोद्देशकः, इदानी द्वितीयस्यावसरः, तत्रेदमादिसूत्रम् कतिविहा णं भंते! संसारसमावण्णगा जीवा पण्णता?, गोयमा! छव्विहा पण्णत्ता, तंजहा-पुढविकाइया जाय तसकाइया। से किं तं पुढविकाइया?, पुढबिकाइया दुविहा पण्णत्ता, तंजहासुहमपुढविकाइया बादरपुढविकाइया य । से किं तं सुहमपुढविकाइया?, २ दुविहा पण्णत्ता, तंजहा-पज्जत्तगा य अपजत्तगा य, सेत्तं सुहमपुढविकाइया। से किं तं बादरपुढविक्काइया?, २ दुविहा पण्णत्ता, तंजहा-पजत्तगा य अपज्जत्तगा य, एवं जहा पण्णवणापदे, सहा सत्तविधा पण्णत्ता, खरा अणेगविहा पन्नत्ता, जाव असंखेजा, से तं बादर पुढविक्काइया । सेत्तं पुढविक्काइया । एवं चेव जहा पण्णवणापदे तहेव निरवसेसं भाणितव्वं जाव वणप्फतिकाइया, एवं जाव जत्थेको तत्थ सिता संखेजा सिय असंखेजा सिता अर्णता, सेत्तं बादरवणप्फतिकाइया, से तं वणस्सइकाइया । से किं तं तसकाइया?, २ चउब्विहा पण्णत्ता, तंजहा-इंदिया तेइंदिया च. जी०५०२४ Jan Educat an inte For Private & Personal Use Only MINiainelibrary.org
SR No.600089
Book TitleJivajivabhigamopanga Sutra
Original Sutra AuthorChaturdash Purvadhar
AuthorMalaygiri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1919
Total Pages938
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_jivajivabhigam
File Size20 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy