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संलेखना
बावकधर्म
मिच्छत्तं, अवंझमोक्खतरुवीयं सयलगुणमूलं पडिवन्जिय संमत्तं, कुगइनिबंधणकम्मबंधजलपवाहपालिं मग्गादिसुहहेउपुन्नपश्चाशक- पबंधजणणी असंखभवोवचियकम्मवाहिनिजरणओ मोक्खारोग्गरसायणं गहेऊण देसविरई " नवकारेण विबोहो" इच्चाइ चूर्णिः ।
विहियाणुहाणपरेण अहाउयं परिपालणीयं, तहा गामाइगमणसंभवे तदुचियसामायारी पउंजणपरेण य भवियवं,
तहाहि-"अहिगरणखामणं खलु चेइयसाहूण वंदणं चेव । संदेसंमि विभासा जइगिहिगुणदोसवेक्खाए ॥१॥ साहूण ॥११८
सावगाण य सामायारी विहारकालंमि । जत्थरिथ चेइयाई वंदावती तहिं सर्व ॥ २॥ पढमं तओ य पच्छा वंदति सयं सिया न वेलत्ति । पढम चिय पणिहाणं करिति संघमि उवउत्ता ॥ ३ ॥ पच्छाकयपणिहाणा विहरता साहुमाइ दवणं । जति अमुगगामे देवा वंदाविया तुझे ॥ ४ ॥ ते विय कयंजलिउडा सद्धा संवेगपुलइयसरीरा । अवमामि. उत्तमंगा तं बहु मन्नति सुहझाणा ॥ ५॥ तेसिं पणिहाणाओ इयरेसिपि य सुहाउ झाणाउ । पुनं जिणेहि भणियं नउ संकमउत्ति तो मेरा ॥ ६ ॥ ते पुण कयपणिहाणा वंदित्ता नेव वा निवेदंति । पञ्चक्खमुसाबाई पावा खु जिणेहिं ते भणिया ॥ ७॥ जेविय कयंजलिउडा सद्धा संवेगपुलइयसरीरा । बहु मन्नति न सम्मं बंदणगं ते वि पावत्ति ॥ ८॥ जइवि न वंदणवेला तेणाइभएसु चेहए तहवि । दद्दणं पणिहाणं नवकारेणावि संघमि ॥ ९॥ तंमि वि कए समाणे वंदावणगं निवेइयवति । तयभावंमि पमाया दोसो मणिओ जिंणिदेहिं ॥ १०॥ एवं सामायारि णाऊण विहीए जे पउंति ।
ते होंति एत्थ कुसला सेसा सवे अकुसला उ ॥ ११ ॥" एत्थत्ति विहरणविहीए तहा-" अन्ने अभिग्गहा खलु निरइया* रेण होंति कायवा। पडिमादओवि य तहा विसेसकरणिजजोगा य ।। १२ ।" तत्थन्नेभिग्गहा जहा-" पहसंतगिलाणेसु य
AURANGA
H॥११८॥
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