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________________ भीष्मस्य निधानाकांक्षी (भीष्म) ११३.४८ भीष्मस्य निधनार्थाय ( भीष्म) ११०.८ भीष्मस्य पतितं केतु ( भीष्म) ४८.६० भीष्मस्य संज्ञा तु (विरा) ६६.१४ भीष्मस्य समरे कर्म ( भीष्म) १०७.७ भीष्मस्य समरे राजन् (द्रोण) ११४.९० भीरस्य समरे राजन् ( भीष्म) ११६.३० भीष्मस्याथ वच: (उद्योग) १२८.३३ भीष्मस्याभिमुखान्य ( भीष्म) ११०.२० भीष्मस्यैतद्वचः श्रुत्वा (अनु) ७.२७ भीष्महेतोः पराक्रान्त (भीष्म) १११.५४ भीष्माग्निमभिक्रुद्ध' (भीष्म) ५६.२६ भीष्माणां द्वे शतेप्यत्र (सभा) ८.२४ भीष्मादवाप्य चास्त्राणि (द्रोण) २३.७० भीष्मादीनां च सर्वेषां (आश्रम) १२.५ भीष्मादीनां महाबाहो (आश्रम) ११.११ भीष्मद्रोणात्कृपात् (वन) ३६.२५ भीष्मावमानात्संख्यायां (शांति) ५.१२ भीष्माश्रिताः सुमधुराः (अनु) २६. ११ भीष्मे च पुरुषव्याघ्रे (द्रोण ) ९८.४२ Jain Education International भीष्मे च युद्धि विक्रांत ( भीष्म) ११८.१३ भीष्मेण धर्मतो राजन् (आ) १०९.१३ भीष्मेण धार्तराष्ट्राणां (भीष्म) ८१.२१ भीष्मेण सर्वमुक्तोऽसि (आश्रम) ७.२१ भीष्मेण सहिताः सर्वे ( भीष्म) ६६.३ भीष्मेण सोमदत्तेन (शल्य) ६३.४६ भीष्मेण हि महाप्राज्ञ (उद्योग) १२६.४१ भीष्मेणातुलवीर्येण ( भीष्म) ५९.३४ भीष्मेणोक्ते ततो द्रोणो (उद्योग) १४८.१ भीष्मे तु सङग्रामशिरो ( विरा) ६५.१ भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे (उद्योग) १२.७ भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे (उद्योग) १२९.४९ भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे (वन) ३७.४ भीष्मे ब्रुवति तद्वाक्यं (उद्योग) २१.८ भीष्मे रथात् प्रपतिते (भीष्म) १२०.६ भीष्मे वा कुरुशार्दू ले (उद्योग) १७७.७ भीष्मे शान्तनवे राजन् (सभा) ३७.१० भीष्मे स्वर्ग अनुप्राप्ते ( आश्रम) ६.२ भीष्मे हतेभृशं दुःखान् (भीष्म) १४.५७ भीष्मोऽग्रतः सर्वसैन्य ( भीष्म) २०.९ महाभारतम् :: लोकानुक्रमणी भीष्मो द्रोणः कृपः कर्ण (कर्ण) ३२.६ भीष्मो द्रोणः कृपः कर्ण (वन) १७४.३ भीष्मो द्रोणः कृपः (उद्योग) १३१.४० भीष्मो द्रोणः कृपश्चैव (सभा) ६०.२ भीष्मद्रोणकृपादीनां (वन) २५७.८ भीष्मो द्रोणः कृपो (उद्योग) ५५.४३ भीष्मो होणः शल्यः ( उद्योग ) ४७.६ भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च (कर्ण) ९६.३२ भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च (विरा) ३५.२ भीष्मो द्रोणश्च (उद्योग) ५१.४५ भीष्मोऽपि रथिनां ( भीष्म) ११४.४७ भीष्मोऽपि समरे ( भीष्म) भीष्मोऽपि समरे पार्थ ( भीष्म) ५२.४९ भीष्मोऽपि समरे राजन् (भीष्म) ७८.२६ भीष्मो बुद्धिमदान्मा (आ) १०५. ५२ भीष्मोऽब्रवीत् महाराज (वन) २५३.४ भीष्मो यदकरोत् (भीष्म) १४.३३ भीष्मो राज्यं च राष्ट्र ( आ ) १२६.२१ भीष्मो वः समरे (भीष्म) ११७-२७ भीष्मो वसूनामन्य (उद्योग) १८५.१८ १०७.८ For Private & Personal Use Only भीष्मोहमस्मि भद्रं ते (वन) ८१.२० भीष्मो हि समरे क्रुद्धो (भीम) ५३.३ भुक्त एव तु कौन्तेयो (आ) १३२.२४ भुक्तपूर्वी स्त्रियं ये च द्रोण) ७३.२७ भुक्तमेतेन बह्नन्नं (सभा) ४१.१० भुक्तं प्रियाण्यवाप्तानि ( आ ) १५८.३३ भुक्तं भुक्तमिदं (आव) १९.३९ भुक्तं मे तिष्ठ तावत (उद्योग) १०६.१२ भुक्तं राज्यफलं पुत्रा (आश्रम) १७.१७ भुक्तवत्यस्म्यहं देव (वत ) २६३.२२ भुक्तत्सु च विप्रेषु (वन) ३.५३ भुक्तवन्तं च विप्र (गति) १७०.६ भुताश्च विविधा (शल्य) भुक्ते परिजने पश्चाद् (अनु) १४१.४२ भुक्तो वाप्यथवाऽभुक्तो (आ) १७०.१७ भुक्त्वा चान्नं ततः (वन) २६०.१७ भुक्त्वा चान्नानि (वन) १५७.२३ भुक्त्वा तानपि सक्तून्स (आव) ९०.६६ भुङ्क्ते च दानं तत् (वन) २००.१० भुक्ते चिकित्सक (अनु) ५.३० १३५.१४ ५६३ मुक्ते तु पत्नी यं चैषां (अनु) १२५.३० भुक्तेन्यस्मिन् कदाचित् ( आश्व) ९०.२७ भुङ्क्ते सा तत्र तं (वन) २३०.३८ मुक्ष्व भोगान्मातुभिश्च (आश्व ) १.९ भुङ्क्ष्व भोगान्मया (आ) १३६.१६ भुङ्क्ष्व राज्य (उद्योग) १४०.२५ भुङ्क्ष्वेमां पृथिवी ( भीष्म) ६५.३७ भुजते पितरो देवा (अनु) १३४.१२ भुजंग इव निर्मोकात् (अनु) ११२.८ भुजङ्गभोगवदना (शल्य) ४५.६२ भुजंगमानां शापस्य मात्रा (आ) ३५.१ भुजंगं वै सदा हन्यां यं यं ( आ ) १०.२ भुजङ्गा इव वेगेन (द्रोण ) १५६.७४ भुजङ्गाभोगवासेन श्रोणि ( विरा) ६.१३ भुजंगानां सुपर्णानां (आ) ६५.५४ भुजनका धनुः स्रोता (शल्य) ६.३० भुजानां च महाभाग (शल्य ) १४.१६ भुजान्तरं प्राप्य धनञ्जय (कर्ण) ६१.३० भुजान्परिघसंकाशान् (द्रोण) १४५.३५ भुजाभ्यां परिगृह्यं न ( आश्व) ६१.२७ www.jainelibrary.org
SR No.600055
Book TitleMahabharatam
Original Sutra AuthorNagsharan Sinh
Author
PublisherNag Prakashan Delhi
Publication Year1992
Total Pages840
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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