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MASA HASSAULES
बोधेऽपि, तथाहि-इच्छामीत्यादि भणी एक खमासमणुं देइ १ सामायिक मुहपत्तिं पडिलेइमि इसुं कही ऊभा थइ || इच्छामि खमासमणो भणी खमासमणुं देइ करी २ उतडूथको वेदिकामां हि बाहुकरी मुहंपत्ति पडिलेही एकखमासमणे सामाइयं संदिसावेमि ३ इसु भणी बीअखमासमणे सामाइअंठाएमि ४ इसो भणी तइअ खमासमण देइ करी ५ अर्धावनतगात्र हुतो तिण्ह नमस्कार कही तिन्नवार करेमि भंते इसुं सामायिकसूत्र तिन्न वार कहइ गुरुवचनतणी अनुभाषणा करता हुंतो सामाइकारोपण विधि नंदी सिद्धान्तमांहे तिण्ह नमस्कारभणनपूर्वक सामायिक दंडकरहइ भणनइ तो पाछइ इरियावही पडिक्कमीयइ । आवश्यकचूर्णीवृत्तिमाही इम भणियइ छ। यथा-"करेमि भंते सामाइअं सा. जाव साहू पञ्जुवासेमि त्ति काऊण पच्छा इरियावहियं पडिक्कमई" तओ पाछइ विस्तरतो द्वादशावर्तवंदनक देइ करी प्रत्याख्यान कीजइ, संखेपइ, तओ खमासमण वंदणापूर्वक प्रत्याख्यान कीजइ तो पाछइ एक खमासमण सज्झा० ७ बीअ खमासमण सज्झायकलं कही ८ सज्झाय, तइअ खमासमण दानपूर्वकं ९ आठ नमस्कार कही पाछइ एक खमासमणे कट्ठासणं संदिसावेमि १० कही बीअ खमासमणे कट्ठासणं पडिगाहेमि कही ११ तइअ खमासमणे पांगुरणं संदिसावेमि १२ कही, चउत्थ खमासमणे पांगुरणं पडिगाहेमि १३ कही करी बइसइ, अनाऽयं विशेषः-प्रभाते सामायिकग्रहणे त्रयोदशक्षमाश्रमणानि, अथ च सायन्तनसामायिकग्रहणे यदि मुखवस्त्रिका प्रतिलेख्य वन्दनकानि दत्त्वा प्रत्याख्यानं करोति तदा चतुर्दश, अन्यथा तु त्रयोदशैव ॥ ७८॥
॥ इति सामायिकग्रहणे त्रयोदश-क्षमाश्रमणाधिकारः॥७८॥
॥ इति सामायिशव ॥ ७८॥ " असवस्त्रिका प्रतिभभाते सामायिक
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