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________________ ७ * कम् । श्रीजिनवल्लभसूरिसामाचारी अधिकारः सामाचा- विहिणा गुरुणो करेइ किइकम्मं । बत्तीसदोसरहियं, पणवीसावस्सगविसुद्धं ॥९॥थद्ध १ पविद्ध २ मणाढिअ ३ परिरीशत- Kापिंडिअ ४ मंकुसं ५ ससुबत्तं ६ । कच्छवरिंगिअ ७ टोलगइ-८ ढड्डरं ९ चेइ-आबद्धं १०॥१०॥ मणदुदु ११ रुट १२ तजिय १३ सढ १४ हीलिअ१५तिणिअ १६ भंडणीअंच १७ । दिद्वमदिदै १८ संग १९ कर २० मोअण २१ मूण २२ मूअं च २३ ॥११॥ भय २४ मित्ती २५ गारव २६ कारणेहिं २७ पलिओवि । [चि]अं २८ भयंतं च २९ । आलिद्ध ३० ॥१३७॥ मणालिद्धं ३१ चूलिअ ३२ चुडुलित्ति बत्तीसा ॥ १२॥ उपवेसमहाजायं, दुहोणयं पयडबारसावत्तं । एगनिखमणतिगुत्तं, चउसिर न मणंति पणवीसा ॥ १३ ॥ अह सम्ममवणअंगो, करजुअविहिधरिअपोत्तिरयहरणो। परिचिंतिय अइआरे, जहक्कम गुरुपुरो विअडे ॥ १४ ॥ अह उवविसित्तु सुत्तं, सामाइअमाइअं पढीअ पयओ। अब्भुट्ठियओ मि इच्चा-इ पढइ दुह उढिओ विहिणा ॥१५॥ दाऊण वंदणं तो, पणगाइसु जइसु खामए तिन्नि । किइकम्म किरियठिओ, सड्डी गाहातिगं भणई ॥ १६ ॥ अह [इय] सामाइअउस्सग्गसुत्तमुच्चरिअ काउसग्गठिओ । चिंतइ उज्जोयदुर्ग, चरित्तअइआरसुद्धि४ कए ॥ १७॥ विहिणा पारिअ सम्म-त्तसुद्धिहेउं च पढिअ उज्जोअं। तह सबलोयअरिहं-तचेइआरोहणुस्सग्गं ॥१८॥ काउं उज्जोयगरं, चिंतिय पारेइ सुद्धसम्मत्तो। पुक्खरवरदीवहूं, कड्डइ सुयसोहणनिमित्तं ॥१९॥ पुण पणवीसोस्सासां Pउस्सग्गं कुणइ पारए विहिणा । तो सयलकुसलकिरिआ, फलाण सिद्धाण पढइ थयं ॥ २० ॥ अह सुअसमिद्धिहेउ, सुय देवीए करेइ उस्सग्गं । चिंतेइ नमुक्कार, सुणइ वदेइ व तीइ थुई ॥२१॥ एवं खेत्तसुरीए, उस्सग्गं कुणइ सुणइ देइ थुई। पढिअंच पंचमंगलं उवविसइ पमज संडासे ।। २२ ॥ पुत्रविहिणेव पेहिअ, पुत्तिं दाऊण वंदणं गुरुणो । इच्छामो अणु ॥१३७॥ Jain Education inte For Private & Personal use only Alww.jainelibrary.org
SR No.600047
Book TitleSamacharishatakama
Original Sutra AuthorSamaysundar
Author
PublisherJindattsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages398
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size21 MB
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