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________________ अशनादिनिर्णयाधिकार: सामाचा- 18|न्दरोपाध्यायविनिर्मितश्रीषडावश्यकबालावबोधे पञ्चानामपि निर्णयप्रतिपादनात् , तथाहि-असन कहतां अन्न-चोखा ज्वारि रीशत- वरटी मुंग प्रमुख सर्वधान, सात सत्तु गिहुँ [आदि ]ना सर्व लोट सर्वराब सालणा लाडु प्रमुख सर्व पक्वान्न, सूरणादि सर्व कंद दूध दही मंडादिक सर्वकेलवी वस्तु, हींग वेसण विरयाली लूण सैंधवादिक ए सर्व असन मांहि जाणिवा ॥१॥ |हिवे पानक कहतां आछण जवोदक तुषोदक तंदुलोदक उष्णोदक शुद्धोदक कहतां वर्णाढ्य प्रमुखसर्वअपकाय पानक | ॥१२५॥ जाणिवा, अथवा काष्ठज पिष्टज सुरादि द्राखनापाणी साकर आंबिलपाणी इक्षुरसादि काकडी चीभडा कालिंगना जल इत्यादि सर्व पानक जाणवा । २ । हिवे खादिम कहतां सुखडी नालेर खजूर द्राख विदाम सेक्युं धान आंबा केला काकडी| |अखोड खारेक प्रमुख सर्व मेवो इत्यादिक खादिम ॥३॥ हिवे स्वादिम कहतां तंबोल सुंठ मिरी पिंपल हरडे बहेडा तुलसी कसेलो काथो जेठीमध तमालपत्र एलची लवींग बीडंग काठी अजमो अजमोद कुलिंजण चीणीकबोबा कचूरो कांटासेलीयो मोथ हरडे कुंभठउ पान सोपारी पोकरमूल जवासामूल बावची बालउछाली धवछालि खयरसार खेजडछालि ए सर्व स्वादिम ॥ ४॥ हिवे निंबके-छाल मूलपान सिली गोमूत्र गिलोइ कडूकिरियातउ अतिविष कुडउ सूकडिराख रोहणी पीपलामूल वज धमासउ नाहिं रींगणी एलीयो चिणोठी कयर वोरनामूल कथारियउ कुंवारि इत्यादि अणाहार on५॥ पिणि ए अणाहार जउ इच्छा पाखइ अनिष्ट पणइ लीजे तो, अने जउ भावता लीजे तो आहारमाही पडइ इति । M॥१२५॥ श्रीतरुणप्रभसूरिकृतबालावबोधे तु, एवं, तथाहि चतुर्विध आहार अशन पान खादिम खादिम तत्र अशन-ओदन रांध्या चोखा सत्तु मुंग राब खंडखाद्यादि पक्का For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org Jain Education Inter
SR No.600047
Book TitleSamacharishatakama
Original Sutra AuthorSamaysundar
Author
PublisherJindattsuri Gyanbhandar
Publication Year1939
Total Pages398
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size21 MB
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